Friday, August 7, 2026
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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों और कारीगरों ने लिया पारंपरिक कला को बढ़ावा देने का संकल्प सीडीओ दिवेश शाशनी ने बुनकरों को किया प्रोत्साहित, गुणवत्ता सुधार और आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप कार्य करने पर दिया जोर

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों और कारीगरों ने लिया पारंपरिक कला को बढ़ावा देने का संकल्प

सीडीओ दिवेश शाशनी ने बुनकरों को किया प्रोत्साहित, गुणवत्ता सुधार और आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप कार्य करने पर दिया जोरसौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान

रुद्रपुर। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को जिला उद्योग केंद्र सभागार, रुद्रपुर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी ने प्रतिभाग कर जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे बुनकरों एवं हथकरघा कार्य से जुड़े कारीगरों का मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम में जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों से करीब 70 से 80 बुनकर एवं कारीगर शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से सविता देवी, फेमिदा सहित अन्य बुनकर एवं हथकरघा कार्य से जुड़े कारीगर मौजूद रहे। सभी ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में सहभागिता की और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव एवं विचार साझा किए।

मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी ने अपने संबोधन में कहा कि हथकरघा भारतीय संस्कृति, परंपरा और विरासत की अमूल्य धरोहर है। पीढ़ियों से चली आ रही बुनकरी एवं हस्तशिल्प की कला न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का साधन भी है।

उन्होंने स्थानीय बुनकरों एवं कारीगरों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता में लगातार सुधार करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि पारंपरिक कला का संरक्षण करते हुए बुनकरों को आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं को भी समझना होगा। उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, उपयोगिता और बाजार की मांग के अनुरूप बदलाव कर हथकरघा उत्पादों को अधिक व्यापक बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर हथकरघा परंपरा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रोत्साहन के लिए सामूहिक रूप से शपथ भी दिलाई। बुनकरों और कारीगरों ने हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र के विकास, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने तथा पारंपरिक बुनकरी कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया।इस दौरान बुनकरों एवं कारीगरों ने हथकरघा क्षेत्र से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों और हथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी चर्चा की। कार्यक्रम में स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, पारंपरिक बुनकरी कला के संरक्षण तथा कारीगरों को प्रोत्साहन देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

कार्यक्रम में महाप्रबंधक उद्योग विपिन कुमार सहित जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए बुनकर, हथकरघा कार्य से जुड़े कारीगर एवं संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।।

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