Monday, September 21, 2026
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काशीपुर तहसील में कमिश्नर दीपक रावत का औचक निरीक्षण, लंबित मामलों पर जताई कड़ी नाराजगी

काशीपुर तहसील में कमिश्नर दीपक रावत का औचक निरीक्षण, लंबित मामलों पर जताई कड़ी नाराजगी
पांच साल पुराने वादों की समीक्षा, लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश; आवेदन से पहले रिपोर्ट लगाने का मामला भी सामने आयासौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान

काशीपुर। कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत ने सोमवार को काशीपुर तहसील का औचक निरीक्षण कर राजस्व कार्यों और जनसुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने तहसील कार्यालय के विभिन्न पटलों, अभिलेखागार, राजस्व अनुभागों सहित एसडीएम कोर्ट में लंबित मामलों की बारीकी से समीक्षा की। पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित स्वामित्व वादों में लापरवाही मिलने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित कार्मिकों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
मंडलायुक्त ने कहा कि तहसील में आने वाले फरियादियों के कार्यों का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। आम जनता से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पांच साल पुराने स्वामित्व वादों की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने उपजिलाधिकारी कोर्ट में पांच वर्ष से लंबित स्वामित्व वादों की समीक्षा की। पांच मामलों में से दो में लापरवाही सामने आने पर उन्होंने जिलाधिकारी को संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। साथ ही पूर्व आदेशों का अनुपालन नहीं करने वाले लेखपाल और पेशकार को एक सप्ताह के भीतर प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश भी दिए।
मंडलायुक्त ने धारा 176, 210 और 229 बी सहित पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों की भी समीक्षा की। उन्होंने पाया कि कुछ मामलों में समय रहते निर्णय किया जा सकता था, लेकिन बार-बार आदेश जारी होने के बावजूद अंतिम आदेश नहीं किए गए। इस पर उन्होंने संबंधित कार्मिकों का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए।

कुर्रा तैयार करने में देरी पर भी नाराजगी
जमीन और पारिवारिक बंटवारे से संबंधित मामलों की समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई मामलों में कुर्रा तैयार करने के आदेश काफी पहले दिए जा चुके थे, लेकिन संबंधित लेखपालों ने समय पर कुर्रा तैयार नहीं किया। मंडलायुक्त ने इस पर भी नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी को संबंधित कार्मिकों से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए।

143 के मामलों में भी व्यवस्था सुधारने के निर्देश
मंडलायुक्त ने धारा 143 के तहत भूमि के गैर-कृषि उपयोग से संबंधित आवेदनों की भी समीक्षा की। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन प्राप्त आवेदनों के साथ संबंधित पंजिकाओं का अवलोकन किया। ऑफलाइन माध्यम से प्राप्त होने वाले आवेदनों की जानकारी उन्होंने एसडीएम और तहसीलदार से ली।
इसके बाद उन्होंने कानूनगो कक्ष का निरीक्षण किया। यहां कानूनगो के पास प्राप्त होने वाले आवेदनों की प्राप्ति पंजिका नहीं बनाए जाने पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने जिलाधिकारी को संबंधित दोनों कानूनगो का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। साथ ही तहसील परिसर में दस बड़े बकायेदारों की सूची प्रदर्शित करने के निर्देश एसडीएम और तहसीलदार को दिए।आवेदन 18 को जमा, रिपोर्ट 16 तारीख की
निरीक्षण के दौरान एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसने तहसील की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। मंडलायुक्त के अनुसार एक आवेदन 18 तारीख को जमा किया गया था, जबकि उस पर रिपोर्ट 16 तारीख को ही लगा दी गई थी उन्होंने मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी को संबंधित कानूनगो से तत्काल जवाब तलब करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि यदि कानूनगो अथवा अन्य संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी मंडलायुक्त ने कहा कि विभिन्न आवेदनों पर प्राप्ति की तिथि दर्ज नहीं होने के कारण यह पता लगाना कठिन हो रहा है कि कितने प्रकरण वास्तव में लंबित हैं। उन्होंने मौके पर ही व्यवस्था को दुरुस्त करने और प्रत्येक आवेदन की प्राप्ति तिथि दर्ज करने के निर्देश दिए निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष जिला विकास प्राधिकरण जयकिशन, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्र, एसडीएम अभय प्रताप सिंह, सीओ प्रशांत कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।।

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