Sunday, November 1, 2026
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458 खाद्य नमूनों में 133 की जांच रिपोर्ट का अता-पता नहीं, मिलावटखोरों पर कार्रवाई कैसे होगी? खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, नमूने लेने में तेजी लेकिन जांच रिपोर्ट आने में सुस्ती; लैब में खाली पड़े पद भी बने बड़ी चुनौती

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, नमूने लेने में तेजी लेकिन जांच रिपोर्ट आने में सुस्ती; लैब में खाली पड़े पद भी बने बड़ी चुनौतीसौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान

रुद्रपुर। उत्तराखंड में खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने और आम जनता को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों के नमूने तो लगातार लिए जा रहे हैं, लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने से मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार प्रभावित हो रही है।

हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 458 खाद्य नमूनों में से 133 की जांच रिपोर्ट का पता नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब नमूनों की जांच रिपोर्ट ही समय पर उपलब्ध नहीं होगी तो मिलावट करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कैसे सुनिश्चित होगी?

सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि खाद्य जांच प्रयोगशालाओं में कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की 13 जिलों की जांच व्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है। प्रयोगशाला में स्वीकृत पदों के मुकाबले कर्मचारियों की कमी जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण नमूनों की जांच और रिपोर्ट तैयार करने में देरी की समस्या सामने आ रही है।

नमूने लेने में तेजी, कार्रवाई के लिए रिपोर्ट का इंतजार

खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर बाजारों, दुकानों और खाद्य प्रतिष्ठानों से नमूने लिए जाते हैं। लेकिन जांच रिपोर्ट आने में देरी होने से विभाग की कार्रवाई भी प्रभावित होती है। मिलावट की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला की रिपोर्ट जरूरी होती है। ऐसे में रिपोर्ट लंबित रहने का सीधा फायदा मिलावट करने वाले कारोबारियों को मिल सकता है।

सरकार के सामने भी व्यवस्था सुधारने की चुनौती

खाद्य पदार्थों में मिलावट सीधे लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे में जांच प्रयोगशालाओं में खाली पदों को भरना, जांच प्रक्रिया को तेज करना और लंबित रिपोर्टों का समयबद्ध निस्तारण करना जरूरी हो गया है।

अब बड़ा सवाल यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग लंबित 133 रिपोर्टों को लेकर क्या कदम उठा रहा है? इन रिपोर्टों के निस्तारण की समयसीमा क्या है? प्रयोगशालाओं में रिक्त पद कब तक भरे जाएंगे और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय होगी?

जनता की सेहत से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में केवल नमूने लेना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि उनकी जांच समय पर हो और मिलावट की पुष्टि होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

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