Thursday, October 22, 2026
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ऊधम सिंह नगर

पहले जंतर-मंतर से आकाश नापा जाता था, आज जंतर-मंतर से सरकार नापी जाती है।

पहले जंतर-मंतर से आकाश नापा जाता था, आज जंतर-मंतर से सरकार नापी जाती है।— अंजुम क़ादरी ✍🏻

दिल्ली के कनॉट प्लेस के पास स्थित जंतर-मंतर आज केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आवाज़ का प्रतीक बन चुका है। वर्ष 1724 में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने इसे खगोलीय अध्ययन के लिए बनवाया था, लेकिन समय के साथ यह जनता की आवाज़ बुलंद करने का सबसे प्रमुख मंच बन गया देशभर में दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, मथुरा और वाराणसी में स्थापित जंतर-मंतर वैज्ञानिक विरासत के प्रतीक हैं, जबकि दिल्ली का जंतर-मंतर लोकतांत्रिक संघर्षों का साक्षी रहा है।

इतिहास गवाह है

आज़ादी के आंदोलन से लेकर निर्भया आंदोलन, अन्ना हज़ारे का जनलोकपाल आंदोलन और किसान आंदोलनों तक, अनेक जनआंदोलनों की गूंज जंतर-मंतर से उठी। समय-समय पर यहां प्रतिबंध भी लगे, लेकिन लोकतांत्रिक आवाज़ें फिर लौट आईं।

2026: फिर वही आवाज़

23 जुलाई 2026 को छात्र NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के विरोध में जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं।

उनकी प्रमुख मांगें हैं—
शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा।
पेपर लीक से प्रभावित और जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा।
छात्रों की मांगों पर सांसदों से सीधा संवाद।

आंदोलन के समर्थन में कई सार्वजनिक हस्तियों और राजनीतिक नेताओं ने अपनी-अपनी राय रखी है। साथ ही परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक से छात्रों और सरकार—दोनों पर पड़ने वाले आर्थिक व मानसिक बोझ को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

सवाल सरकार से

अगर परीक्षा की निष्पक्षता ही संदेह के घेरे में आ जाए, तो युवाओं का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा? क्या छात्रों की चिंताओं पर समय रहते गंभीर संवाद नहीं होना चाहिए?

लोकतंत्र का संदेश

जंतर-मंतर हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं, बल्कि संवाद, जवाबदेही और जनता की आवाज़ सुनने से मजबूत होता है।
इतिहास बताता है कि हर दौर में सरकारों के खिलाफ आंदोलन हुए हैं। आपातकाल (1975–77) भी भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है, जिसने यह सिखाया कि जनता की आवाज़ को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।

सरकार और आंदोलनकारी—

दोनों की जिम्मेदारी है कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रहकर समाधान का रास्ता निकालें। युवाओं की चिंताओं का सम्मान और शांतिपूर्ण संवाद ही किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

जय हिंद।
जय शिक्षा। जय जवान। जय किसान।

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