Wednesday, June 24, 2026
Latest:
ऊधम सिंह नगर

नैनीताल से मसूरी तक विवादों से रहा नाता, फिर कैसे बार-बार सरोवर नगरी लौटे ईओ रोहिताश शर्मा? – पुराने कार्यकालों को लेकर भी उठ चुके हैं सवाल – तबादलों और विरोध के बावजूद अहम निकायों में रही तैनाती – जनप्रतिनिधियों और संगठनों की नाराजगी के बीच फिर चर्चा में आया नगर पालिका प्रशासन

नैनीताल से मसूरी तक विवादों से रहा नाता, फिर कैसे बार-बार सरोवर नगरी लौटे ईओ रोहिताश शर्मा?

– पुराने कार्यकालों को लेकर भी उठ चुके हैं सवाल

– तबादलों और विरोध के बावजूद अहम निकायों में रही तैनाती

– जनप्रतिनिधियों और संगठनों की नाराजगी के बीच फिर चर्चा में आया नगर पालिका प्रशासनसौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में गाइड लाइसेंस, पार्किंग और सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा का पुराना कार्यकाल भी चर्चाओं में आ गया है। स्थानीय स्तर पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर विवादों और विरोध के बावजूद बार-बार महत्वपूर्ण नगर निकायों में उनकी तैनाती कैसे होती रही।

रोहिताश शर्मा पूर्व में भी नैनीताल नगर पालिका में तैनात रह चुके हैं। वर्ष 2013 से 2018 तक उनका कार्यकाल नैनीताल में रहा। इसके बाद उनकी तैनाती मसूरी नगर पालिका में हुई। हालांकि बाद में एक बार फिर उनकी वापसी नैनीताल नगर पालिका में हो गई।स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से एक ही पर्यटन महत्व वाले निकायों में तैनाती कई सवाल खड़े करती है। लोगों का कहना है कि शासन को यह देखना चाहिए कि संवेदनशील नगर निकायों में अधिकारियों की तैनाती पारदर्शी तरीके से हो।

रोहिताश शर्मा का नाम पूर्व में भी तबादलों और विवादों के चलते चर्चाओं में रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वर्ष 2019 में जब उनकी मसूरी नगर पालिका में वापसी की चर्चाएं हुई थीं तो वहां के कुछ जनप्रतिनिधियों और संगठनों ने इसका विरोध किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक विरोध करने वालों ने उनके पूर्व कार्यकाल को लेकर कई सवाल उठाए थे और अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। हालांकि रोहिताश शर्मा ने उस समय इन आरोपों को नकारते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया था उनके प्रशासनिक सफर में तबादलों को लेकर कानूनी लड़ाई भी सामने आ चुकी है। वर्ष 2012 में तबादले के एक मामले में उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत में मामला पहुंचने के बाद तबादले को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया चली थी।

वहीं मसूरी नगर पालिका के कुछ मामलों को लेकर भी पूर्व में जांच और अदालती प्रक्रिया चर्चा में रही हालांकि कई मामलों में अंतिम निर्णय और कानूनी स्थितियां अलग-अलग स्तरों पर रहीं अब नैनीताल में एक बार फिर गाइड लाइसेंस, पार्किंग व्यवस्था और सफाई जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन नगरी के विकास के लिए प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर क्यों बार-बार विवादों के बीच आने वाले अधिकारियों को महत्वपूर्ण नगर निकायों में जिम्मेदारी मिलती रहती है? क्या शासन इन सवालों और स्थानीय लोगों की नाराजगी पर संज्ञान लेगा या नैनीताल नगर पालिका में विवादों का दौर यूं ही जारी रहेगा?

error: Content is protected !!
Call Now Button