Monday, June 22, 2026
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ऊधम सिंह नगर

आखिर कब होगी जिला पंचायत राज अधिकारी पर कार्रवाई? बार-बार विवाद, विभागीय जांच और सवालों के बावजूद जिम्मेदारी बरकरार, शासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

आखिर कब होगी जिला पंचायत राज अधिकारी पर कार्रवाई?
बार-बार विवाद, विभागीय जांच और सवालों के बावजूद जिम्मेदारी बरकरार, शासन की चुप्पी पर उठ रहे सवालसौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान

रुद्रपुर। पंचायती राज विभाग में जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) के कार्यकाल को लेकर उठ रहे सवाल अब और गंभीर होते जा रहे हैं। पिछले दिनों उनकी बार-बार ऊधमसिंह नगर में तैनाती, निलंबन के बाद पुनः महत्वपूर्ण पदों पर वापसी तथा करोड़ों रुपये के अनुदान और प्रशासनिक कार्यों से जुड़े मामलों को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद अब जनमानस और विभागीय कर्मचारियों के बीच एक ही प्रश्न चर्चा का विषय बना हुआ है—आखिर जिला पंचायत राज अधिकारी पर कार्रवाई कब होगी?

सूत्रों के अनुसार डीपीआरओ का नाम पूर्व में कई विवादों और विभागीय जांचों से जुड़ चुका है। देहरादून में तैनाती के दौरान उन पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिसके चलते शासन स्तर पर कार्रवाई और निलंबन तक की नौबत आई थी। इसके बावजूद उनकी बहाली और फिर पसंदीदा जिलों में तैनाती को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

जानकारों का कहना है कि पंचायती राज विभाग ग्रामीण विकास योजनाओं और करोड़ों रुपये के सरकारी बजट के संचालन से जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग है। ऐसे में किसी भी अधिकारी पर यदि गंभीर आरोप लगते हैं तो पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच और स्पष्ट कार्रवाई आवश्यक होती है। लेकिन संबंधित मामलों में अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होने से शासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
विभागीय गलियारों में चर्चा है कि यदि सामान्य कर्मचारियों और अधिकारियों पर छोटी-छोटी अनियमितताओं में कार्रवाई हो सकती है, तो लंबे समय से विवादों में घिरे अधिकारी के मामलों में जांच की प्रगति और परिणाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे हैं। इससे कर्मचारियों के बीच भी असंतोष की स्थिति बन रही है।

जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि शासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं तो अधिकारी को सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट दी जाए और यदि आरोपों में तथ्य हैं तो नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बार-बार उठ रहे विवादों, विभागीय कार्रवाई के इतिहास और तैनाती को लेकर लगातार हो रही चर्चाओं के बीच आखिर जिला पंचायत राज अधिकारी पर अंतिम और स्पष्ट कार्रवाई कब होगी? यही प्रश्न अब जनता, विभागीय कर्मचारियों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।।

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