ऊधम सिंह नगर

अधिवक्ता की प्रभावी पैरवी रंग लाई: हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोपों से किशोर बरी, डीएनए रिपोर्ट भी नहीं साबित कर सकी अपराध

अधिवक्ता की प्रभावी पैरवी रंग लाई: हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोपों से किशोर बरी, डीएनए रिपोर्ट भी नहीं साबित कर सकी अपराधसौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान

नैनीताल। हत्या और साक्ष्य मिटाने जैसे गंभीर आरोपों में चार वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे एक किशोर को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है। किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) नैनीताल ने मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सभी साक्ष्यों, डीएनए रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य तथ्यों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद आरोपी किशोर को दोषमुक्त करार दिया। बोर्ड ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा है।

मामला थाना मुक्तेश्वर में वर्ष 2022 में दर्ज अपराध संख्या 02/2022 से संबंधित है। पुलिस ने किशोर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और धारा 201 (साक्ष्य मिटाने) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। आरोप था कि हत्या के बाद शव को छिपाकर साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और वैज्ञानिक रिपोर्टों को बोर्ड के समक्ष रखा, लेकिन इनमें से कोई भी आरोपी की संलिप्तता को निर्णायक रूप से स्थापित नहीं कर सका।सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अभियोजन की पूरी कहानी पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि मामले में न तो कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह है और न ही ऐसा वैज्ञानिक साक्ष्य जो आरोपी किशोर को सीधे अपराध से जोड़ सके। अधिवक्ता ने डीएनए रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता और उनकी कानूनी प्रासंगिकता पर भी विस्तार से बहस की। बचाव पक्ष की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद बोर्ड ने माना कि अभियोजन की कहानी संदेह से परे साबित नहीं हो पाई अपने फैसले में किशोर न्याय बोर्ड ने कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि किसी भी आरोपी को तभी दोषी ठहराया जा सकता है जब उसके खिलाफ आरोप पूर्ण रूप से और संदेह से परे सिद्ध हों। मात्र आशंका, अनुमान या अधूरी परिस्थितिजन्य श्रृंखला के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। बोर्ड ने पाया कि इस मामले में प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी पूर्ण और अटूट नहीं थी तथा अभियोजन आरोपी और अपराध के बीच सीधा संबंध स्थापित करने में असफल रहा।बोर्ड ने यह भी माना कि मामले में प्रस्तुत डीएनए रिपोर्ट अभियोजन के लिए निर्णायक साक्ष्य साबित नहीं हो सकी। वैज्ञानिक रिपोर्टों से भी यह स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हुआ कि हत्या की घटना में आरोपी किशोर की कोई भूमिका थी। ऐसे में विधि के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना आवश्यक था बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने अपने आदेश में किशोर को हत्या और साक्ष्य मिटाने के सभी आरोपों से दोषमुक्त करते हुए उसके संरक्षक द्वारा प्रस्तुत बंधपत्र और जमानतनामा निरस्त करने के निर्देश दिए। साथ ही जिला प्रोबेशन अधिकारी, नैनीताल को किशोर की देखरेख, संरक्षण और पुनर्वास से संबंधित आवश्यक योजना सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया है।

प्रमुख बिंदु

चार साल बाद मिली आजादी

वर्ष 2022 में दर्ज हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में आरोपी बनाए गए किशोर को करीब चार साल बाद न्याय मिला। बोर्ड ने साक्ष्यों के अभाव में उसे दोषमुक्त कर दिया।

अधिवक्ता की मजबूत पैरवी बनी निर्णायक

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान अभियोजन की कहानी में मौजूद कमजोरियों को उजागर किया। कानूनी और तथ्यात्मक तर्कों के आधार पर बोर्ड को यह विश्वास दिलाया गया कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।

डीएनए रिपोर्ट भी नहीं कर सकी पुष्टि

अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत डीएनए रिपोर्ट को मजबूत साक्ष्य माना जा रहा था, लेकिन बोर्ड ने पाया कि यह रिपोर्ट आरोपी की संलिप्तता को निर्णायक रूप से साबित नहीं करती।

परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला टूटी

हत्या के मामले में अभियोजन मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर निर्भर था, लेकिन बोर्ड ने माना कि घटनाओं की पूरी और अटूट श्रृंखला स्थापित नहीं हो सकी।

संदेह का लाभ देकर किया दोषमुक्त

किशोर न्याय बोर्ड ने कहा कि जब आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो पाए तो कानून के अनुसार आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। इसी आधार पर किशोर को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

पुनर्वास और संरक्षण पर भी जोर

फैसले के बाद बोर्ड ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को किशोर के पुनर्वास, संरक्षण और भविष्य की निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हहैं।

error: Content is protected !!
Call Now Button