ऊधम सिंह नगर

किसानों की आवाज और जनसेवा का पर्याय थे यशवंत मिश्रा, आज पुण्यतिथि पर होंगे याद

किसानों की आवाज और जनसेवा का पर्याय थे यशवंत मिश्रा, आज पुण्यतिथि पर होंगे यादसौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर। किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले, युवाओं के प्रेरणास्रोत और जनसेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने वाले वरिष्ठ किसान एवं भाजपा नेता स्वर्गीय यशवंत मिश्रा की पुण्यतिथि आज श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। इस अवसर पर उनके परिजन, समर्थक एवं क्षेत्रवासी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके संघर्षमय और प्रेरणादायी जीवन को याद करेंगे।

लालपुर क्षेत्र के ग्राम प्रतापपुर में 20 जुलाई 1960 को जन्मे यशवंत मिश्रा ने युवावस्था से ही समाज सेवा और नेतृत्व के गुणों का परिचय देना शुरू कर दिया था। वर्ष 1978 में डिग्री कॉलेज में प्रवेश लेने के साथ ही उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। कॉलेज जीवन के दौरान उन्होंने समाज की समस्याओं को नजदीक से समझा और जनसेवा को अपने जीवन का मूल उद्देश्य बना लिया।

वर्ष 1985 में उन्होंने युवाओं को संगठित कर सामाजिक कार्यों की मजबूत नींव रखी। इसके बाद विभिन्न सामाजिक गतिविधियों और जनहित के मुद्दों पर उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती गई। वर्ष 1992 में लालपुर-किच्छा में आयोजित तत्कालीन मंत्री एवं पूर्वांचल के प्रभावशाली नेता हरिशंकर तिवारी के स्वागत समारोह में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका ने उन्हें एक जनप्रिय और प्रभावशाली सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचान दिलाई।

स्वर्गीय यशवंत मिश्रा ने किसानों की समस्याओं को हमेशा अपनी प्राथमिकता में रखा। वर्ष 2007 से 2015 तक उन्होंने किसानों के अधिकारों, उनकी समस्याओं और उनके हितों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया कृषि और ग्रामीण समाज से जुड़े मुद्दों को उन्होंने मजबूती से उठाया और किसानों की आवाज बनकर कार्य किया राजनीतिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। भारतीय जनता पार्टी के संगठन को मजबूत करने और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी मेहनत, समर्पण और जनसंपर्क क्षमता ने उन्हें क्षेत्र में एक सम्मानित नेता के रूप में स्थापित किया।

क्षेत्र के लोग उन्हें एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में याद करते हैं, जो हर समय गरीबों, किसानों और जरूरतमंदों की सहायता के लिए तत्पर रहते थे। उनका सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और समाज के प्रति समर्पण उन्हें आम लोगों के बीच विशेष बनाता था। 14 जून 2016 को उनके आकस्मिक निधन से क्षेत्र ने एक कर्मठ समाजसेवी और जननेता को खो दिया था। हालांकि आज भी प्रतापपुर में बना उनका स्मृति द्वार उनके संघर्ष, सेवा और समाज के प्रति समर्पण की गवाही देता है।
स्वर्गीय यशवंत मिश्रा का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।।

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