एक अधिकारी शासन की व्यवस्था पर भारी! – सवालों के घेरे में डीपीआरओ की बार-बार ऊधमसिंह नगर वापसी – दस साल में तीसरी बार जिले में तैनाती, तबादला व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
एक अधिकारी शासन की व्यवस्था पर भारी!
– सवालों के घेरे में डीपीआरओ की बार-बार ऊधमसिंह नगर वापसी
– दस साल में तीसरी बार जिले में तैनाती, तबादला व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रूद्रपुर। सरकारी विभागों में पारदर्शी व्यवस्था और तबादला नीति को लेकर भले ही शासन स्तर पर लगातार प्रयास किये जाते हों, लेकिन कुछ अधिकारियों के मामलों में व्यवस्था खुद सवालों के घेरे में आ जाती है। ऐसा ही एक मामला पंचायती राज विभाग से जुड़े एक अधिकारी की तैनाती को लेकर चर्चाओं में है।
जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) विद्या सिंह सोमनाल की ऊधमसिंह नगर जिले में बार-बार तैनाती अब विभागीय गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि विवादों और विभागीय कार्रवाई का सामना कर चुके अधिकारी को बार-बार पसंदीदा जिले में तैनाती मिल जाती है।
जानकारी के अनुसार पिछले करीब दस वर्षों में डीपीआरओ विद्या सिंह सोमनाल को ऊधमसिंह नगर जिले में तीसरी बार नियुक्ति मिली है। पहली बार सितंबर 2016 में उनकी तैनाती जिले में हुई थी। जुलाई 2019 में उनका स्थानांतरण हुआ, लेकिन दिसंबर 2021 में वह एक बार फिर ऊधमसिंह नगर वापस आ गये।
सितंबर 2023 में पुनः स्थानांतरण के बाद वह देहरादून में तैनात रहे, लेकिन जून 2025 में एक बार फिर ऊधमसिंह नगर जिले में उनकी वापसी हो गई। बार-बार एक ही जिले में तैनाती मिलने को लेकर अब विभागीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं।
सूत्रों का कहना है कि सामान्य रूप से अधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए स्थानांतरित किया जाता है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में संतुलन और पारदर्शिता बनी रहे। ऐसे में एक ही अधिकारी की बार-बार एक ही जिले में वापसी कई सवाल खड़े कर रही है।
डीपीआरओ सोमनाल का कार्यकाल पहले भी विवादों में रहा है। देहरादून में तैनाती के दौरान अनियमितताओं के आरोपों के चलते शासन स्तर से उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी की गई थी। हालांकि बाद में वह बहाल हो गये।
चर्चा यह भी है कि बहाली के बाद उनका स्थानांतरण पिथौरागढ़ किया गया था, लेकिन उन्होंने वहां कार्यभार ग्रहण नहीं किया और बाद में पुनः मैदानी जिले में तैनाती मिल गई। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिन अधिकारियों को नियमानुसार अलग-अलग और दुर्गम क्षेत्रों में भी सेवा देनी होती है, उनके मामले में बार-बार मैदानी और पसंदीदा जिलों में वापसी कैसे हो रही है।
इस पूरे मामले ने पंचायती राज विभाग की स्थानांतरण व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर दिये हैं।।

