दागी अधिकारी को निलंबन के बाद भी फिर मिली अहम तैनाती – सवालों में डीपीआरओ का कार्यकाल, 4.22 करोड़ के अनुदान मामले ने बढ़ाई थीं मुश्किलें – देहरादून में अनियमितताओं के आरोपों के बाद हुई थी कार्रवाई, फिर बहाली और तैनाती को लेकर चर्चाएं तेज
दागी अधिकारी को निलंबन के बाद भी फिर मिली अहम तैनाती
– सवालों में डीपीआरओ का कार्यकाल, 4.22 करोड़ के अनुदान मामले ने बढ़ाई थीं मुश्किलें
– देहरादून में अनियमितताओं के आरोपों के बाद हुई थी कार्रवाई, फिर बहाली और तैनाती को लेकर चर्चाएं तेज
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रूद्रपुर। पंचायती राज विभाग में अधिकारियों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवालों के बीच डीपीआरओ विद्या सिंह सोमनाल का कार्यकाल एक बार फिर चर्चाओं में है। ऊधमसिंह नगर जिले में बार-बार तैनाती को लेकर उठ रहे सवालों के बाद अब उनके पूर्व कार्यकाल से जुड़े विवाद भी चर्चा का विषय बन रहे हैं।
देहरादून में जिला पंचायत राज अधिकारी के पद पर तैनाती के दौरान विद्या सिंह सोमनाल के खिलाफ शासन स्तर पर कार्रवाई की गई थी। उन पर शासकीय कार्यों में उदासीनता और दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही जैसे आरोप लगे थे। इन्हीं आरोपों के चलते उन्हें निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।
जानकारी के अनुसार डोईवाला ब्लॉक की ग्राम पंचायत प्रतीतनगर से जुड़े निर्माण कार्यों की शिकायत की जांच में दोषी पाए गए ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के विरुद्ध नियुक्ति प्राधिकारी के रूप में कार्रवाई नहीं करने का मामला सामने आया था। इसके अलावा बिना सक्षम स्तर की अनुमति और बिना निदेशक पंचायती राज को संज्ञान में लाए एडीओ पंचायत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को लेकर भी उनकी कार्यप्रणाली सवालों में रही। इतना ही नहीं, डोईवाला ब्लॉक के अंतर्गत जिला पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन कार्य में भी दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता बरतने के आरोप लगे थे।
4.22 करोड़ का अनुदान समय पर जारी नहीं होने पर उठे थे सवाल
डीपीआरओ सोमनाल के कार्यकाल से जुड़ा सबसे बड़ा मामला त्रिस्तरीय पंचायतों को मिलने वाली धनराशि से संबंधित रहा। आरोप लगे थे कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में त्रिस्तरीय पंचायतों की दूसरी किस्त के रूप में प्राप्त करीब 4.22 करोड़ रुपये की धनराशि समय पर संबंधित पंचायतों को आवंटित नहीं की गई। नियमों के अनुसार केंद्रीय वित्त आयोग के अंतर्गत जारी अनुदान को निर्धारित समय सीमा में पंचायतों तक पहुंचाया जाना आवश्यक होता है, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों। लेकिन धनराशि समय पर जारी नहीं होने के कारण वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर यह राशि सरेंडर करनी पड़ी थी। इस मामले के बाद शासन स्तर पर उनकी कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठे और कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के बाद भी वापसी ने खड़े किये सवाल
हालांकि निलंबन के कुछ समय बाद डीपीआरओ सोमनाल को पुनः बहाल कर दिया गया। इसके बाद स्थानांतरण और तैनाती को लेकर भी वह लगातार चर्चाओं में रहे। सवाल यह उठ रहा है कि जिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पूर्व में विवादों और विभागीय कार्रवाई के घेरे में रही हो, उन्हें बार-बार महत्वपूर्ण जिलों में तैनाती कैसे मिल रही है।
पंचायती राज विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में जहां ग्रामीण विकास योजनाओं और करोड़ों रुपये की धनराशि के संचालन की जिम्मेदारी होती है, वहां पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे अहम मानी जाती है। ऐसे में डीपीआरओ की बार-बार प्रभावशाली तैनाती ने विभागीय व्यवस्था और स्थानांतरण प्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिये हैं।।

