Thursday, June 11, 2026
Latest:
ऊधम सिंह नगर

एआरटीओ विभाग में दलाली का कथित खेल ! पहुंच और पैसे वालों के चालान पहले कोर्ट, आम आदमी को महीनों इंतजार — महिला अधिवक्ता ने उठाए गंभीर सवाल

एआरटीओ विभाग में दलाली का कथित खेल! पहुंच और पैसे वालों के चालान पहले कोर्ट, आम आदमी को महीनों इंतजार — महिला अधिवक्ता ने उठाए गंभीर सवालसौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रूद्रपुर। एआरटीओ विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग में दलालों की कथित सक्रियता, अधिकारियों-कर्मचारियों से उनकी सांठगांठ और चालानों के निस्तारण में भेदभाव के आरोपों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। एक महिला अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि विभाग में प्रभाव और पैसे के आधार पर चालानों को न्यायालय भेजने की प्रक्रिया प्रभावित की जा रही है, जिससे आम नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

महिला अधिवक्ता के अनुसार, पुलिस द्वारा किए गए यातायात चालानों को एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत न्यायालय भेजा जाना चाहिए, लेकिन व्यवहार में सभी मामलों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा उनका दावा है कि जिन लोगों की विभाग में पहुंच है या जो दलालों के माध्यम से संपर्क स्थापित कर लेते हैं, उनके चालानों को महज अगले दिन ही न्यायालय भेज दिया जाता है। वहीं आम लोगों के चालान कई महीनों तक लंबित पड़े रहते हैं और उन्हें लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है।

महिला अधिवक्ता ने यह भी दावा किया कि कई ऐसे वाहन स्वामी हैं जिनके चालान हुए दो से तीन वर्ष तक का समय बीत चुका है, लेकिन उनके चालान आज तक न्यायालय नहीं भेजे गए हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों की संख्या कम नहीं है और यह स्थिति विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। उन्होंने पूछा कि जब कुछ मामलों में अगले ही दिन चालान न्यायालय भेजे जा सकते हैं, तो फिर वर्षों तक लंबित पड़े चालानों का औचित्य क्या है।अधिवक्ता का कहना है कि यदि कानून और नियम सभी के लिए समान हैं तो फिर चालानों को न्यायालय भेजने की समयसीमा अलग-अलग क्यों दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में सक्रिय कुछ दलाल लोगों को यह भरोसा दिलाते हैं कि उनकी अधिकारियों तक सीधी पहुंच है और वे चालान संबंधी मामलों को जल्द निपटा सकते हैं। इसके बदले कथित रूप से मोटी रकम लिए जाने की भी चर्चाएं हैं।

सूत्रों का कहना है कि एआरटीओ कार्यालय के आसपास लंबे समय से दलालों का नेटवर्क सक्रिय होने की शिकायतें मिलती रही हैं। आरोप है कि यही नेटवर्क विभागीय प्रक्रियाओं को प्रभावित कर कुछ लोगों को विशेष लाभ पहुंचाने का काम करता है। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करेगा, बल्कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का गंभीर मामला भी माना जाएगा।

महिला अधिवक्ता ने मांग की है कि चालानों को न्यायालय भेजने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि पिछले महीनों और वर्षों में किन-किन मामलों में कितने समय के भीतर चालान न्यायालय भेजे गए और इसके लिए क्या मानक अपनाए गए। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस मामले को लेकर आम नागरिकों और वाहन स्वामियों में भी नाराजगी दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी विभागों में पहुंच और पैसे के आधार पर कार्य होने लगे तो आम आदमी का व्यवस्था से विश्वास उठना स्वाभाविक है। उनका मानना है कि कानून के समक्ष सभी नागरिक बराबर हैं और किसी को विशेष सुविधा देना न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि चालानों के निस्तारण और न्यायालय प्रेषण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की मानवीय हस्तक्षेप, सिफारिश या कथित दलाली की गुंजाइश समाप्त हो सके।

फिलहाल एआरटीओ विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, उठ रहे सवालों के बीच अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विभाग इन आरोपों की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करेगा या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।।

error: Content is protected !!
Call Now Button