बिना 143 कराए कृषि भूमि की धड़ल्ले से हो रही रजिस्ट्री, सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान का आरोप रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर सवाल, नियमों को ताक पर रखकर हो रहे बैनामे
बिना 143 कराए कृषि भूमि की धड़ल्ले से हो रही रजिस्ट्री, सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान का आरोप
रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर सवाल, नियमों को ताक पर रखकर हो रहे बैनामे
रजिस्ट्रार संजीव कुमार की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही, उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। जनपद के रजिस्ट्रार कार्यालय में कृषि भूमि की रजिस्ट्रियों को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कृषि भूमि का विधिवत भूमि उपयोग परिवर्तन (धारा 143) कराए बिना ही लगातार रजिस्ट्री की जा रही है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंच रहा है। मामले को लेकर स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संपत्ति कारोबार से जुड़े लोगों में चर्चा का माहौल है। जानकारों के अनुसार, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तहत कृषि भूमि का उपयोग यदि आवासीय, व्यावसायिक या अन्य गैर-कृषि कार्यों के लिए किया जाना है तो पहले सक्षम अधिकारी से धारा 143 के तहत भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति लेना आवश्यक होता है। इसके बाद ही संबंधित भूमि की प्रकृति बदलती है और उसके अनुसार स्टांप शुल्क एवं अन्य राजस्व देय होते हैं। लेकिन आरोप है कि इस अनिवार्य प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए कृषि भूमि की रजिस्ट्री बड़े पैमाने पर कराई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कृषि भूमि पर तेजी से प्लॉटिंग और कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं में शामिल कई भूखंडों की रजिस्ट्रियां भी लगातार हो रही हैं, लेकिन भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि संबंधित दस्तावेजों और रजिस्ट्रियों की जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी उजागर हो सकती है।
सरकार को होने वाले राजस्व नुकसान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। राजस्व मामलों के जानकारों का कहना है कि भूमि उपयोग परिवर्तन के बाद निर्धारित शुल्क और अन्य देय राजस्व सरकार के खाते में जमा होते हैं। यदि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता तो सीधे तौर पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचता है। आरोप है कि ऐसे मामलों में अब तक करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति हो चुकी है। पूरे मामले में रजिस्टर संजीव कुमार की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नियमों और निर्धारित मानकों के विपरीत रजिस्ट्रियों को मंजूरी दी जा रही है। कई मामलों में आवश्यक जांच-पड़ताल किए बिना ही दस्तावेजों का पंजीकरण किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रजिस्ट्रार कार्यालय में कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में नियमों को नजरअंदाज कर काम किया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
जनपद के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि पिछले वर्षों में हुई कृषि भूमि की सभी संदिग्ध रजिस्ट्रियों की जांच कराई जाए साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि किन मामलों में धारा 143 की प्रक्रिया पूरी किए बिना रजिस्ट्री की गई और उससे सरकार को कितना राजस्व नुकसान हुआ लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में भूमि विवादों की संख्या बढ़ सकती है। साथ ही शासन की राजस्व व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए आवश्यक है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए फिलहाल इस मामले में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका है। प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल राजस्व हानि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करेगा।
समाचार प्रकाशन से पूर्व संबंधित अधिकारी से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।।

