प्रसव पीड़ा के दौरान जच्चा की मौत से मचा बवाल, CMS डॉ. कुलदीप यादव की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप, उप जिला अस्पताल में हंगामा, पुलिस बल तैनात
प्रसव पीड़ा के दौरान जच्चा की मौत से मचा बवाल, CMS डॉ. कुलदीप यादव की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप, उप जिला अस्पताल में हंगामा, पुलिस बल तैनात
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
सितारगंज में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। प्रसव पीड़ा के दौरान उपचार के लिए उप जिला अस्पताल पहुंची एक गर्भवती महिला की मौत हो जाने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। घटना के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ और स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मृतका के परिजनों का आरोप है कि महिला लंबे समय तक प्रसव पीड़ा से तड़पती रही, लेकिन अस्पताल में समय पर न तो विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध कराए गए और न ही समुचित उपचार मिला। आरोप है कि अस्पताल कर्मियों की लापरवाही, उदासीन रवैये और अव्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाओं के कारण महिला की जान चली गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाता तो महिला को बचाया जा सकता था।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी संख्या में लोग एकत्र हो गए और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर बदइंतजामी, लापरवाही और मरीजों के प्रति अमानवीय व्यवहार के आरोप लगाए। मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसके बाद पुलिस प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराने और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया स्थानीय लोगों का कहना है कि उप जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं लंबे समय से चरमराई हुई हैं। आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर, विशेषज्ञ चिकित्सक और संसाधनों की भारी कमी है, जिसके चलते मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। कई मामलों में मरीजों को निजी अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है, जिससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है।
लोगों ने बताया कि इससे पहले भी कई प्रसूता महिलाओं और गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों में भेजे जाने के मामले सामने आ चुके हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यवस्थाओं में सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब इस ताजा घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।
CMS डॉ. कुलदीप यादव की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के बाद उप जिला अस्पताल के CMS डॉ. कुलदीप यादव की कार्यप्रणाली भी चर्चा और विवादों के केंद्र में आ गई है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि अस्पताल की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, लगातार सामने आ रही लापरवाहियों और मरीजों की समस्याओं के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी सुधार देखने को नहीं मिला है। लोगों का कहना है कि डॉ. कुलदीप यादव के कार्यकाल में अस्पताल की व्यवस्थाएं लगातार सवालों के घेरे में रही हैं। कई बार मरीजों और उनके परिजनों द्वारा डॉक्टरों की अनुपलब्धता, समय पर इलाज न मिलने, रेफर सिस्टम में अनियमितता और अस्पताल कर्मियों के व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई कठोर कार्रवाई नहीं किए जाने से आम जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूर्व में भी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही से जुड़े कई मामले सामने आए, लेकिन उन मामलों में भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नागरिकों के बीच यह चर्चा है कि CMS डॉ. कुलदीप यादव की राजनीतिक और उच्च अधिकारियों तक मजबूत पकड़ होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जनता के बीच इसको लेकर लगातार असंतोष बना हुआ है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार कर अनुभवी और जवाबदेह प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति की मांग भी उठाई गई है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
फिलहाल प्रशासन द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी वहीं मृतका के परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।।

