रुद्रपुर इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन या सिर्फ दिखावा? करोड़ों के दावों के बीच स्थानीय उद्योगों के सामने कई सवाल
रुद्रपुर इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन या सिर्फ दिखावा? करोड़ों के दावों के बीच स्थानीय उद्योगों के सामने कई सवाल
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। 8 से 10 जुलाई तक आर्क होटल में आयोजित होने जा रहे 35वें रुद्रपुर इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन 2026 को आयोजक उत्तराखंड का सबसे बड़ा औद्योगिक आयोजन बता रहे हैं। 150 से अधिक स्टॉल, 1,200 उद्योग प्रतिनिधि और 5,000 से अधिक आगंतुकों के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इन दावों के बीच स्थानीय उद्योग जगत में कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसे आयोजनों से धरातल पर कितना फायदा होता है।
स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि पिछले वर्षों में भी औद्योगिक प्रदर्शनियां आयोजित हुईं, लेकिन उनके बाद स्थानीय उद्योगों में निवेश, रोजगार या उत्पादन क्षमता में कितना वास्तविक बदलाव आया, इसका कोई सार्वजनिक आकलन सामने नहीं आया ऐसे में इस बार भी बड़े-बड़े दावों के बीच परिणामों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रदर्शनी में अधिकांश स्टॉल बड़ी कंपनियों के होते हैं, जबकि छोटे और मध्यम उद्योग केवल दर्शक बनकर रह जाते हैं। आधुनिक मशीनों और ऑटोमेशन तकनीकों का प्रदर्शन तो किया जाता है, लेकिन उनकी लागत इतनी अधिक होती है कि अधिकांश स्थानीय इकाइयों के लिए उन्हें खरीद पाना आसान नहीं होता।
एक और बड़ा सवाल यह है कि क्या इस आयोजन में स्थानीय एमएसएमई इकाइयों, स्टार्टअप्स और युवा उद्यमियों को पर्याप्त स्थान दिया गया है या फिर मंच केवल बड़े ब्रांडों तक सीमित रहेगा। यदि स्थानीय उद्योगों की भागीदारी सीमित रही तो आयोजन का उद्देश्य अधूरा माना जाएगा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मशीनों की प्रदर्शनी लगाने से उद्योगों की समस्याओं का समाधान नहीं होता। आज उद्योग बिजली की बढ़ती लागत, कच्चे माल की महंगाई, वित्तीय सहायता की कमी, कुशल श्रमिकों के अभाव और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं। यदि इन मुद्दों पर ठोस चर्चा और समाधान नहीं निकलता, तो ऐसे आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।
आयोजकों की ओर से तकनीकी सेमिनार और बिजनेस नेटवर्किंग की बात कही जा रही है, लेकिन उद्योग जगत की नजर इस बात पर रहेगी कि इन बैठकों से कितने वास्तविक व्यावसायिक समझौते होते हैं और कितने स्थानीय उद्योगों को इसका सीधा लाभ मिलता है। हालांकि आयोजकों का दावा है कि यह प्रदर्शनी उद्योगों को नई तकनीक, आधुनिक मशीनरी और व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराएगी। लेकिन इसका वास्तविक मूल्यांकन आयोजन समाप्त होने के बाद ही संभव होगा, जब यह स्पष्ट होगा कि कितने उद्योगों ने नई तकनीक अपनाई, कितने नए व्यावसायिक समझौते हुए और स्थानीय अर्थव्यवस्था को कितना लाभ मिला फिलहाल रुद्रपुर का औद्योगिक जगत इस प्रदर्शनी से बड़ी उम्मीदें लगाए हुए है। अब देखना यह होगा कि यह आयोजन वास्तव में उद्योगों के लिए परिवर्तनकारी साबित होता है या फिर बड़े दावों और प्रचार तक ही सीमित रह जाता है।।

