डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती: सामाजिक न्याय के पथ पर चलने का संकल्प
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर कुर्मी महासभा की प्रदेश अधक्ष शिवांगी गंगवार ने उनके विचारों और आदर्शों को याद करते हुए समाज को एकजुट होकर समानता और न्याय के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का जीवन केवल एक महान व्यक्तित्व की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, शिक्षा और आत्मसम्मान का प्रेरणास्रोत है। उन्होंने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए समाज के वंचित और शोषित वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह सबसे बड़ा हथियार है, जिससे व्यक्ति अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बन सकता है।
एडवोकेट शिवांगी गंगवार ने आगे कहा कि भारतीय संविधान के निर्माण में डॉ. अम्बेडकर की भूमिका ऐतिहासिक रही है। उनके द्वारा निर्मित संविधान आज भी देश के हर नागरिक को समान अधिकार, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देता है। उन्होंने सामाजिक समानता और भाईचारे को राष्ट्र की प्रगति का आधार बताया।
वर्तमान समय में जब समाज कई प्रकार की चुनौतियों और असमानताओं का सामना कर रहा है, ऐसे में बाबा साहेब के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका संदेश—“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”—आज भी हर व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर उन्होंने सभी से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे डॉ. अम्बेडकर के बताए मार्ग पर चलेंगे, समाज में समानता और भाईचारे को बढ़ावा देंगे तथा संविधान के मूल्यों का सम्मान करेंगे।

