ऊधम सिंह नगर

महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों पर गहरी चिंता एवं ठोस कार्रवाई की मांग — शिवांगी गंगवार, प्रदेश अध्यक्ष, कुर्मी महासभा

उत्तराखंड राज्य में महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराध अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। विभिन्न रिपोर्टों एवं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, छेड़छाड़, यौन अपराध, साइबर उत्पीड़न तथा पति एवं ससुराल पक्ष द्वारा क्रूरता के मामलों में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है। यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

उत्तराखंड जैसे शांत, सांस्कृतिक एवं धार्मिक राज्य में महिलाओं को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए, किंतु आज महिलाएं घर, कार्यस्थल, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक परिवहन और डिजिटल माध्यमों तक पर असुरक्षा का अनुभव कर रही हैं।
महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में वृद्धि के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिनमें घरेलू हिंसा, शराब एवं नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, बेरोजगारी, सामाजिक असंतुलन, परिवारों का विघटन, कानून का भय कम होना, पुलिस जांच में देरी तथा मामलों के शीघ्र निस्तारण का अभाव शामिल हैं। पर्वतीय क्षेत्रों से पुरुषों के पलायन के कारण भी कई महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक असुरक्षित हो जाती हैं।

इस परिस्थिति में केवल कठोर कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार को चाहिए कि प्रत्येक जिले में महिला हेल्प डेस्क को सशक्त किया जाए, महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए, फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएं तथा महिला काउंसलिंग और विधिक सहायता केंद्रों को मजबूत किया जाए।

इसके साथ ही विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकार और कानूनी जागरूकता से संबंधित शिक्षा को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। राज्य सरकार को शराब एवं नशे के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने चाहिए तथा सार्वजनिक स्थानों पर CCTV कैमरे, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था को प्राथमिकता देनी चाहिए। महिलाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जाने चाहिए।

समाज को भी यह समझना होगा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण प्रदान किए बिना किसी भी राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है।
अतः राज्य सरकार, प्रशासन और समाज के सभी वर्गों से आग्रह है कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम के लिए ठोस, प्रभावी और समयबद्ध कदम उठाए जाएं, ताकि उत्तराखंड को वास्तव में महिलाओं के लिए सुरक्षित राज्य बनाया जा सके।।

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