ऊधम सिंह नगर

रुद्रपुर में गैस एजेंसियों पर बढ़ता दबाव: जनप्रतिनिधियों की दखलंदाजी से बिगड़ रही व्यवस्था, कर्मचारी और प्रबंधक तनाव में

रुद्रपुर में गैस एजेंसियों पर बढ़ता दबाव: जनप्रतिनिधियों की दखलंदाजी से बिगड़ रही व्यवस्था, कर्मचारी और प्रबंधक तनाव में

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर में रसोई गैस वितरण व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। स्थानीय गैस एजेंसियों पर जनप्रतिनिधियों के बढ़ते दबाव ने न केवल प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित किया है, बल्कि कर्मचारियों और प्रबंधकों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। लगातार सामने आ रहे आरोपों ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।अनैतिक दबाव के आरोप, एजेंसी संचालक परेशान

सूत्रों के अनुसार, कई गैस एजेंसी प्रबंधकों पर जनप्रतिनिधियों द्वारा अनियमित और अनैतिक कार्य कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इनमें बिना बुकिंग गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना, प्राथमिकता सूची में बदलाव करना और विशेष लोगों को लाभ पहुंचाना जैसे मामले शामिल हैं। एजेंसी संचालकों का कहना है कि इस तरह के दबाव के चलते वे नियमों के अनुसार काम नहीं कर पा रहे हैं।

कर्मचारियों में भय और मानसिक तनाव का माहौल

गैस एजेंसियों में काम करने वाले कर्मचारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि वे लगातार मानसिक दबाव में काम कर रहे हैं। किसी भी समय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप की आशंका बनी रहती है, जिससे कार्यस्थल पर असुरक्षा और तनाव का माहौल है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उन्होंने दबाव मानने से इनकार किया, तो उन्हें नौकरी जाने या अन्य प्रताड़ना का डर बना रहता है।पहले भी हो चुकी है दुखद घटना

यह समस्या नई नहीं है। चंपावत जिले में पहले भी एक गैस एजेंसी प्रबंधक ने कथित दबाव और मानसिक उत्पीड़न के चलते आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठाया था। उस घटना ने पूरे प्रदेश में चिंता पैदा की थी, लेकिन इसके बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।

सिलेंडरों की अवैध उठान और वितरण के आरोप

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ जनप्रतिनिधि स्वयं गैस एजेंसियों पर पहुंचकर सिलेंडर उठाते हैं और उन्हें अपने वार्डों में मनमाने तरीके से वितरित करते हैं। इससे न केवल वास्तविक उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिल पा रही है, बल्कि कालाबाजारी और पक्षपात को भी बढ़ावा मिल रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन गंभीर आरोपों के बावजूद संबंधित प्रशासनिक और विभागीय अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे जनप्रतिनिधियों के हौसले और बढ़ रहे हैं।बड़ी घटना की आशंका, तत्काल हस्तक्षेप की मांग

स्थानीय नागरिकों, कर्मचारियों और एजेंसी संचालकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो रुद्रपुर में भी कोई बड़ी और दुखद घटना सामने आ सकती है।

रुद्रपुर में गैस एजेंसियों पर बढ़ता दबाव केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय संकट का रूप लेता जा रहा है। यदि जल्द ही सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्थिति पूरे क्षेत्र की आपूर्ति व्यवस्था और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।।

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