Tuesday, September 15, 2026
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बेमौसमी बारिश और तेज हवाओं से गेहूं की फसल तबाह, किसानों के लिए राहत पैकेज की मांग: शिवांगी गंगवार

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

कुर्मी महासभा की प्रदेश अध्यक्ष शिवांगी गंगवार ने बेमौसमी वर्षा और तेज हवाओं से तराई क्षेत्र में गेहूं की फसल को हुए व्यापक नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे किसानों के लिए गंभीर संकट की स्थिति बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत, लागत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल कई स्थानों पर पूरी तरह से गिर चुकी है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा और उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि तराई क्षेत्र के अधिकांश किसान पहले से ही बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं उनकी स्थिति को और अधिक दयनीय बना देती हैं। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की है, और फसल के नुकसान से उनके ऊपर कर्ज का बोझ और बढ़ने की संभावना है। यह स्थिति न केवल किसानों बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंताजनक है।शिवांगी गंगवार ने शासन और प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और राजस्व, कृषि तथा आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा शीघ्र सर्वे कर वास्तविक क्षति का आंकलन किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सर्वे प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रभावित किसान को राहत से वंचित न रहना पड़े।

उन्होंने यह भी मांग की कि सर्वे के आधार पर प्रभावित किसानों को शीघ्र और पर्याप्त मुआवजा प्रदान किया जाए, जिससे उन्हें आर्थिक राहत मिल सके और वे आगामी फसल की तैयारी के लिए पुनः खड़े हो सकें। साथ ही उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज, फसल बीमा दावों का त्वरित निस्तारण, और आवश्यकता पड़ने पर ब्याज मुक्त या कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाए।

शिवांगी गंगवार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो किसानों की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है, जिसका दूरगामी प्रभाव पूरे कृषि तंत्र पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस संवेदनशील मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए तत्काल ठोस और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और उनका विश्वास कायम रखा जा।

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