ऊधम सिंह नगर

नवरात्र में मांस बिक्री पर प्रतिबंध पर उठे सवाल: छोटे दुकानदारों पर सख्ती, बड़े होटलों पर नरमी क्यों?

नवरात्र में मांस बिक्री पर प्रतिबंध पर उठे सवाल: छोटे दुकानदारों पर सख्ती, बड़े होटलों पर नरमी क्यों?

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रूद्रपुर। नवरात्र के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए नगर निगम प्रशासन द्वारा शहर में मांस बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए गए थे। महापौर विकास शर्मा के निर्देश पर यह फैसला धार्मिक भावनाओं के सम्मान और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था। आदेश के बाद शहर के अधिकांश छोटे दुकानदारों और मांस विक्रेताओं ने नियमों का पालन करते हुए अपनी दुकानें बंद रखीं और प्रशासन के प्रति सहयोग का रुख दिखाया।हालांकि, इसी बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, शहर के प्रतिष्ठित रेडिसन ब्लू होटल में इन आदेशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि नवरात्र के दौरान भी होटल में चिकन और अन्य मांसाहारी व्यंजनों की निरंतर सप्लाई और दावतें जारी हैं। यह स्थिति प्रशासन के आदेशों की प्रभावशीलता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

छोटे दुकानदारों में आक्रोश

छोटे व्यापारियों और मांस विक्रेताओं का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन किया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा कई दुकानदारों ने बताया कि त्योहार के दौरान उनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है, लेकिन उन्होंने धार्मिक भावनाओं और कानून का सम्मान करते हुए कोई विरोध नहीं किया

इसके विपरीत, बड़े होटलों और प्रभावशाली संस्थानों द्वारा नियमों की अनदेखी किए जाने से उनमें रोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि अगर नियम बनाए गए हैं, तो उनका पालन सभी पर समान रूप से होना चाहिए।

दोहरे मापदंडों के आरोप

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने नगर निगम पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रशासन कमजोर वर्गों और छोटे व्यापारियों पर तो सख्ती दिखाता है, लेकिन बड़े और रसूखदार संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करने से बचता है।

कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या नगर निगम के अधिकारी इन होटलों की गतिविधियों से अनजान हैं या जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं। यदि ऐसा है, तो यह न केवल प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है बल्कि कानून के समान अनुपालन की भावना को भी कमजोर करता है।

प्रशासन की चुप्पी

इस पूरे मामले में अब तक नगर निगम की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न ही यह बताया गया है कि होटल के खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई की गई है या नहीं प्रशासन की यह चुप्पी भी लोगों के बीच संदेह को और बढ़ा रही है।

आगे क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नगर निगम इस मामले में निष्पक्षता दिखाएगा और रेडिसन ब्लू होटल जैसे बड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगा, या फिर नियम केवल छोटे और कमजोर वर्गों तक ही सीमित रहेंगे

यह मामला केवल एक होटल या कुछ दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता, समानता और कानून के समान अनुपालन का मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में नगर निगम का रुख तय करेगा कि जनता का भरोसा प्रशासन पर कायम रहता है या नहीं।।

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