Sunday, March 15, 2026
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ऊधम सिंह नगर

ईदगाह मुद्दे पर सियासत तेज, नेताओं की चुप्पी पर उठे सवाल – मुस्लिम समाज से NOTA दबाने की अपील

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

ईदगाह मुद्दे पर सियासत तेज, नेताओं की चुप्पी पर उठे सवाल – मुस्लिम समाज से NOTA दबाने की अपील

उधम सिंह नगर। जनपद में ईदगाह से जुड़े मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने इस मामले में जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए नाराज़गी जाहिर की है। समाजसेवी गुफरान खान और सामाजिक कार्यकर्ता सोफिया मानी ने बयान जारी कर मुस्लिम समाज से आगामी चुनाव में सोच-समझकर निर्णय लेने की अपील की है।

गुफरान खान ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को किसी एक राजनीतिक पार्टी का स्थायी नुमाइंदा बनकर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपने हक और अपनी आवाज़ के लिए अलग-अलग राजनीतिक मंच चुनने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि किसी एक पार्टी ने समाज को “खरीद” नहीं लिया है, इसलिए समय-समय पर अपने मुद्दों और अधिकारों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता ही सबसे बड़ी ताकत होती है। अगर जनप्रतिनिधि जनता की भावनाओं और मुद्दों को गंभीरता से नहीं लेते हैं, तो जनता को भी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहिए।

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोफिया मानी ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि इस बार चुनाव में बहुत सोच-समझकर फैसला लिया जाए। उन्होंने कहा कि ईदगाह जैसा अहम और संवेदनशील मुद्दा सामने होने के बावजूद जिले के बड़े-बड़े कांग्रेस नेता खुलकर सामने नहीं आए।

सोफिया मानी ने कहा कि जनपद उधम सिंह नगर से ही नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष जैसे बड़े पदों पर नेता हैं, लेकिन इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनकी तरफ से कोई स्पष्ट और मजबूत आवाज़ नहीं उठाई गई। इससे समाज के लोगों में निराशा और नाराज़गी देखने को मिल रही है।

उन्होंने कहा कि अगर समाज के मुद्दों पर उनके अपने जनप्रतिनिधि ही खामोश रहेंगे, तो समाज को भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी नाराज़गी जाहिर करनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की है कि इस बार चुनाव में NOTA (नन ऑफ द अबव) का बटन दबाकर अपना विरोध दर्ज कराएं।

सोफिया मानी ने कहा कि यह अपील किसी एक व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि समाज के मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वोट सबसे बड़ा हथियार है और इसके जरिए ही जनता अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकती है। स्थानीय स्तर पर यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई लोग इसे समाज की नाराज़गी के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि चुनाव के समय इस तरह की अपीलों का राजनीतिक असर भी पड़ सकता है। हालांकि अभी तक इस मामले पर संबंधित राजनीतिक नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।।हा कि यह अपील किसी एक व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि समाज के मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोतंत् सबसे बड़ा हथियार है और इसके जरिए ही जनता अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकती है। स्थान बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई लोग इसे समाज की नाराज़गी के रूप में देख रहे हैं, ज लोगों का मानना है कि चुनाव के समय इस तरह की अपीलों का

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