बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड चुनाव: महिला आरक्षण की मतगणना पर उठे गंभीर सवाल
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
देहरादून। बार काउंसलिंग का उत्तराखंड के हालिया चुनाव में महिला आरक्षण श्रेणी की मतगणना को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। अधिवक्ताओं के बीच यह मुद्दा चर्चा और चिंता का विषय बन गया है। आरोप है कि मतगणना प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही महिला वर्ग की पाँच सीटों के परिणाम घोषित कर दिए गए, जिससे चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
पहले से तय थे नाम?
कुछ अधिवक्ताओं का दावा है कि महिला आरक्षण के अंतर्गत चुनी जाने वाली पाँच महिलाओं के नाम मतदान से पहले ही “तय” बताए जा रहे थे। उनका कहना है कि चुनाव से पूर्व ही यह चर्चा आम थी कि “यही पाँच महिलाएँ जीतेंगी”, जिससे पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर संदेह गहराया है।
मतगणना से पहले परिणाम घोषित करने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि महिला वर्ग की मतगणना पूरी हुए बिना ही पाँच प्रत्याशियों को विजेता घोषित कर दिया गया।
अन्य महिला उम्मीदवारों के मतों का पूर्ण मिलान नहीं हुआ था।
प्रत्याशियों को बताया जा रहा था कि “अभी वैल्यू निकाली जाएगी” और पूरी गणना के बाद ही परिणाम घोषित होगा।
इसके बावजूद अचानक पाँच नामों की घोषणा कर दी गई।
इस घटनाक्रम से कई प्रत्याशियों और अधिवक्ताओं में असंतोष देखा जा रहा है।
पारदर्शिता पर सवाल
चुनाव प्रक्रिया के दौरान उपस्थित चुनाव अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों पर भी स्पष्ट जानकारी न देने के आरोप लगे हैं। प्रत्याशियों का कहना है कि मतगणना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई।
किस आधार पर परिणाम घोषित किया गया, इसकी विस्तृत और आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई अन्य महिला प्रत्याशियों के अंतिम मतों का आंकड़ा सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया।महिला आरक्षण की भावना पर प्रश्न
महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं को समान अवसर और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। यदि चयन प्रक्रिया में अपारदर्शिता या पूर्व-निर्धारण के आरोप लगते हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों और महिला सशक्तिकरण की भावना दोनों के लिए चिंताजनक माना जा रहा है।
निष्पक्ष जांच की मांग
कई अधिवक्ताओं ने मांग की है कि पूरी मतगणना प्रक्रिया का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए परिणाम घोषित किए जाने से पहले की गणना का विस्तृत ब्यौरा जारी किया जाए आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए फिलहाल इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठे ये सवाल आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकते हैं।।

