Monday, September 14, 2026
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धर्म की आड़ और रसूख नहीं आया काम – अरविंद शर्मा पर पुलिस ने कसा शिकंजा – जल्द हो सकती है पैरोल निरस्त करने की संस्तुति

धर्म की आड़ और रसूख नहीं आया काम

– अरविंद शर्मा पर पुलिस ने कसा शिकंजा

– जल्द हो सकती है पैरोल निरस्त करने की संस्तुति

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर । अटरिया देवी मंदिर परिसर के पास खाली पड़े खेत में नमाज अदा कर रहे बुजुर्ग से मारपीट की घटना केवल एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह एक सजायाफ्ता अपराधी के अहंकार और कानून को ठेंगा दिखाने की पराकाष्ठा है। धर्म की आड़ में छिपे एक कालनेमि को बेनकाब करते इस मामले ने जिले में हलचल मचा रही है। हत्या जैसे जघन्य अपराध में उम्रकैद की सजा काट रहा मंदिर संचालक अरविंद शर्मा जब पैरोल पर बाहर आया, तो उम्मीद थी कि वह प्रायश्चित की राह पर चलेगा, लेकिन उसने नमाज़ अदा कर रहे एक शख्स पर हमला कर यह साबित कर दिया कि भले ही उसने धर्म का चोला ओढ़ रखा है लेकिन मानसिकता उसकी आज भी अपराधियों वाली है। इबादत कर रहे एक निहत्थे रोजेदार पर को लात मारना और लाठी से पीटना न केवल धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि एक अत्यंत अमानवीय कृत्य भी है। अरविंद शर्मा ने जिस क्रूरता के साथ इस वारदात को अंजाम दिया, उससे स्पष्ट होता है कि उसे न तो कोर्ट के आदेशों का सम्मान है और न ही खाकी का कोई खौफ। यह हमला समाज में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की एक सोची-समझी कोशिश भी हो सकती थी, जिसे पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने समय रहते संभाल लिया।

आरोपी अरविंद शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115, 351(3) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि कानून का शिकंजा अब कसने लगा है। सूत्र बताते हैं कि इस मामले को दबाने के लिए सत्ता के गलियारों से कई फोन पुलिस के पास आए और रसूखदारों ने आरोपी को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, लेकिन पुलिस ने किसी भी दबाव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। पैरोल की शर्तों का सरेआम उल्लंघन करने और शांति व्यवस्था के लिए खतरा बनने के बाद अब प्रशासन आरोपी की पैरोल निरस्त करने की संस्तुति करने जा रहा है, जिससे उसकी वापसी फिर से उसी कालकोठरी में होना तय माना जा रहा है जहां से वह कुछ दिनों की राहत लेकर बाहर आया था।

स्थानीय स्तर पर भी इस कार्रवाई का स्वागत हो रहा है क्योंकि मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर एक अपराधी का वर्चस्व न केवल आस्था को चोट पहुँचाता है बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह आरोपी अपनी पैरोल रद्द होने के बाद दोबारा जेल भेजा जाएगा या फिर अपने रसूख के दम पर कोई नया दांव खेलेगा। फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके यह संदेश तो दे ही दिया है कि कानून की नजर में रसूखदार से बड़ा न्याय का तराजू होता है और मानवता को शर्मसार करने वाले किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।।

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