पार्ट-7। तीन अधिकारियों की तैनाती से निर्माण कार्यों तक—अब विभाग से सीधे सवाल
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। ग्रामीण निर्माण विभाग में अल्मोड़ा गृह जनपद वाले तीन अधिकारियों की एक ही जनपद में तैनाती को लेकर शुरू हुई पड़ताल अब कई स्तरों तक पहुंचती है। तैनाती आदेशों से लेकर निर्माण कार्यों, टेंडर, ठेकेदारों, एमबी, भुगतान और गुणवत्ता जांच तक कई ऐसे दस्तावेज हैं, जिनसे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
विभाग से ये सवाल जरूरी
पहला— तीनों अधिकारियों की ऊधम सिंह नगर में तैनाती किस आदेश के तहत हुई?
दूसरा— क्या उनकी तैनाती संबंधित स्थानांतरण नीति और विभागीय नियमों के अनुरूप है?
तीसरा— संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल में कितने निर्माण कार्य स्वीकृत हुए?
चौथा— इन कार्यों की कुल स्वीकृत लागत और वास्तविक भुगतान कितना रहा?
पांचवां— किन ठेकेदारों और फर्मों को कार्य मिले?
छठा— क्या सभी कार्यों की निविदा प्रक्रिया और तकनीकी स्वीकृतियां नियमानुसार हुईं?
सातवां— क्या एमबी, बिल और भुगतान रिकॉर्ड का तकनीकी स्तर पर सत्यापन हुआ?
आठवां— क्या निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र या विभागीय जांच कराई गई?
नौवां— यदि किसी कार्य में शिकायत या आपत्ति मिली तो उस पर क्या कार्रवाई हुई?
दसवां— क्या विभाग संबंधित अवधि के प्रमुख निर्माण कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय परीक्षण कराने पर विचार करेगा?
अब जवाब रिकॉर्ड का होना चाहिए
पूरी पड़ताल में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि तीन अधिकारियों का एक ही गृह जनपद से होना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसी तरह निर्माण कार्यों में किसी ठेकेदार को काम मिलना भी अपने आप में गलत नहीं माना जा सकता लेकिन यदि तैनाती को लेकर सवाल उठे हैं तो तैनाती आदेश सामने रखे जा सकते हैं और यदि निर्माण कार्यों को लेकर सवाल हैं तो संबंधित कार्यों की फाइलें जांची जा सकती हैं। यानी इस मामले में अंतिम तस्वीर आरोपों से नहीं, बल्कि दस्तावेजों, नियमों और मौके पर काम की स्थिति के मिलान से सामने आएगी
अब देखना यह है कि विभाग इन सवालों का जवाब किस स्तर पर देता है और क्या संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं।
“यह पड़ताल यहीं समाप्त नहीं होती अब अगली कड़ी में उपलब्ध दस्तावेजों, विभागीय जवाब और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर मामले की अगली तस्वीर सामने रखी जाएगी।”

