ऊधम सिंह नगर

पार्ट-3 : 11 महीने में एक-एक कर पहुंचे तीनों अधिकारी, अब तैनाती की टाइमलाइन पर सवाल

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर। ग्रामीण निर्माण विभाग में अल्मोड़ा गृह जनपद वाले तीन अधिकारियों की ऊधमसिंह नगर में तैनाती को लेकर सवाल अब केवल इस बात तक सीमित नहीं हैं कि तीनों एक ही जिले में क्यों हैं। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार तीनों अधिकारियों की तैनाती अलग-अलग तारीखों में हुई। करीब 11 महीने के भीतर एक अधिशासी अभियंता और दो सहायक अभियंता ऊधमसिंह नगर में तैनात हुए।

रिकॉर्ड के अनुसार अधिशासी अभियंता अमित भारतीय की ऊधमसिंह नगर में तैनाती 02 अगस्त 2024, जबकि सहायक अभियंता चारु चंद्र जोशी की तैनाती 06 जून 2025 और सहायक अभियंता हेमंत कुमार जोशी की तैनाती 01 जुलाई 2025 को हुई।तीनों अधिकारियों की तैनाती एक ही दिन नहीं हुई, इसलिए इसे किसी एक स्थानांतरण आदेश का परिणाम कहना भी सही नहीं होगा लेकिन एक ही गृह जनपद से संबंधित तीन अधिकारियों का अलग-अलग समय पर एक ही जिले में पहुंचना अब विभागीय पदस्थापना व्यवस्था की पड़ताल का आधार जरूर बन गया है।

पहले आए अधिशासी अभियंता, फिर दोनों सहायक अभियंता

तैनाती की टाइमलाइन पर नजर डालें तो सबसे पहले अमित भारतीय 02 अगस्त 2024 को ऊधमसिंह नगर पहुंचे इसके करीब दस महीने बाद 06 जून 2025 को चारु चंद्र जोशी की तैनाती हुई इसके महज 25 दिन बाद 01 जुलाई 2025 को हेमंत कुमार जोशी भी इसी जिले में तैनात हो गए यानी तीनों अधिकारियों की तैनाती अलग-अलग आदेशों और अलग-अलग समय पर हुई प्रतीत होती है। अब जांच का महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इन तीनों पदस्थापनाओं के पीछे प्रशासनिक आधार क्या था और क्या प्रत्येक तैनाती संबंधित स्थानांतरण नियमों एवं विभागीय प्रक्रिया के अनुरूप हुई।

क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी?

किसी अधिकारी की तैनाती में विभागीय आवश्यकता, रिक्त पद, स्थानांतरण नीति और प्रशासनिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए केवल तारीखों के आधार पर किसी तरह की अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

लेकिन यदि तीनों अधिकारियों का गृह जनपद एक ही है और तीनों को एक ही जनपद में महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी मिली है तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि इनकी तैनाती किन परिस्थितियों में हुई। क्या संबंधित पदों पर पदस्थापना के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई? क्या स्थानांतरण के समय अन्य अधिकारियों के नाम भी विचाराधीन थे? क्या इन पदों पर तैनाती के लिए विभागीय स्तर पर कोई विशेष प्रशासनिक आवश्यकता दर्ज की गई थी? इन सवालों के जवाब तैनाती और स्थानांतरण से जुड़े दस्तावेजों से मिल सकते हैं।

असली पड़ताल अब कार्यकाल की

तैनाती की तारीखें सामने आने के बाद अगला महत्वपूर्ण सवाल निर्माण कार्यों का है। अमित भारतीय के अगस्त 2024 से, चारु चंद्र जोशी के जून 2025 से और हेमंत कुमार जोशी के जुलाई 2025 से ऊधम सिंह नगर में तैनात रहने के दौरान विभाग ने कितने निर्माण कार्य कराए?

इन कार्यों की कुल लागत कितनी रही?

किन योजनाओं में काम स्वीकृत हुए?

किन ठेकेदारों को काम मिले?

कितनी राशि का भुगतान हुआ?

और क्या इन कार्यों की गुणवत्ता एवं तकनीकी प्रक्रिया का निर्धारित मानकों के अनुसार परीक्षण हुआ?

तीनों की साझा अवधि भी जांच का विषय

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 01 जुलाई 2025 के बाद तीनों अधिकारी एक ही समय में ऊधम सिंह नगर में मौजूद रहे इसलिए 01 जुलाई 2025 से आगे की अवधि के निर्माण कार्यों, टेंडरों, निरीक्षणों और भुगतान प्रक्रिया की अलग से समीक्षा की जा सकती है।

यही वह अवधि है जिसमें अधिशासी अभियंता और दोनों सहायक अभियंता एक साथ जिले में कार्यरत रहे इस अवधि में विभागीय निर्णय किस स्तर पर लिए गए और अधिकारियों की जिम्मेदारियां किस प्रकार विभाजित थीं, इसका रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होगा।

अब सामने आने चाहिए ये दस्तावेज

अमित भारतीय की 02 अगस्त 2024 की तैनाती का आदेश।

चारु चंद्र जोशी की 06 जून 2025 की तैनाती का आदेश।

हेमंत कुमार जोशी की 01 जुलाई 2025 की तैनाती का आदेश।

संबंधित पदों की स्वीकृत संख्या और रिक्तियों का रिकॉर्ड।

लागू स्थानांतरण नीति/शासनादेश।

तीनों अधिकारियों का संबंधित अवधि का कार्य-विभाजन।

01 जुलाई 2025 के बाद स्वीकृत प्रमुख निर्माण कार्यों की सूची।

टेंडर, कार्यादेश, एमबी और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड।

सवाल अभी बाकी हैं

तीनों अधिकारियों की अलग-अलग तारीखों में हुई तैनाती यह बताती है कि मामला एक ही आदेश से जुड़ा हुआ नहीं है। इसलिए अब असली पड़ताल यह होनी चाहिए कि तीनों पदस्थापनाओं के अलग-अलग प्रशासनिक आधार क्या थे और 01 जुलाई 2025 के बाद तीनों की साझा तैनाती के दौरान विभागीय कामकाज किस तरह संचालित हुआ।

फिलहाल इन तथ्यों से किसी अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा लेकिन तैनाती की पूरी टाइमलाइन और इसके बाद हुए निर्माण कार्यों का रिकॉर्ड सामने आने से यह जरूर स्पष्ट हो सकता है कि यह सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था थी या इसकी कोई अलग प्रशासनिक पृष्ठभूमि रही।

अगले पार्ट में पड़ताल होगी—01 जुलाई 2025 के बाद तीनों अधिकारियों की साझा तैनाती के दौरान कितने निर्माण कार्य स्वीकृत हुए और उनका वित्तीय आकार कितना रहा?

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