मुकदमों और शिकायतों के बीच सुरक्षा की गुहार, सोशल मीडिया के सहारे पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप
मुकदमों और शिकायतों के बीच सुरक्षा की गुहार, सोशल मीडिया के सहारे पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
मिलक। आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में मुकदमा दर्ज होने और जमानत पर बाहर चल रहे आदेश कुमार शंखधर की ओर से पुलिस सुरक्षा की मांग को लेकर जारी सार्वजनिक सूचना अब चर्चा का विषय बन गई है। शंखधर ने सोशल मीडिया पर एक पत्र जारी कर अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। पत्र में उन्होंने लोगों से इसे अपने मोबाइल में सुरक्षित रखने और किसी अप्रिय घटना की स्थिति में सार्वजनिक करने की अपील भी की है।
शंखधर की इस सार्वजनिक अपील को लेकर मिलक क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ पहले से दर्ज मुकदमों और शिकायतों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि मिलक थाने में उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के मुकदमे के अलावा अन्य मामले भी दर्ज हैं। वहीं, उनके खिलाफ ब्लैकमेलिंग से संबंधित शिकायतों की बात भी सामने आती रही है। हालांकि इन शिकायतों और मुकदमों की वर्तमान स्थिति की पुष्टि संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से किया जाना जरूरी है।
‘लकड़ीबाज’ नाम से चर्चित होने का दावा
स्थानीय लोगों के बीच शंखधर को कथित तौर पर ‘लकड़ीबाज’ नाम से भी संबोधित किए जाने की चर्चा है। आरोप लगाने वाले लोगों का कहना है कि लोगों की समस्याओं के समाधान और सामाजिक सेवा के बजाय शिकायतों को माध्यम बनाकर दूसरों पर दबाव बनाने का उनका तौर-तरीका रहा है। कुछ लोग तो उन पर शिकायतों और कथित ब्लैकमेलिंग के जरिए आर्थिक लाभ लेने तक के आरोप लगाते हैं।
हालांकि ये गंभीर आरोप हैं और इनकी पुष्टि संबंधित जांच एवं पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर ही हो सकती है। शंखधर की ओर से इन आरोपों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सुरक्षा की मांग या सिस्टम पर दबाव बनाने की रणनीति?
सबसे बड़ा सवाल शंखधर द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए सार्वजनिक पत्र को लेकर उठ रहा है। पत्र में उन्होंने अपने साथ किसी अप्रिय घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की बात कही है और इसे अधिक से अधिक लोगों के मोबाइल में सेव करने की अपील की है।
आलोचकों का आरोप है कि सुरक्षा की मांग करने के लिए पुलिस और प्रशासन के समक्ष औपचारिक शिकायत देने के बजाय सोशल मीडिया को हथियार बनाकर माहौल तैयार किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक पोस्ट के जरिए पुलिस-प्रशासन पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
अधिकारियों के साथ तस्वीरें पोस्ट कर दिखाते हैं प्रभाव
शंखधर की सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वह समय-समय पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं और इन तस्वीरों के जरिए क्षेत्र में अपना प्रभाव और अधिकारियों से नजदीकी प्रदर्शित करने का प्रयास करते हैं।
आलोचकों का सवाल है कि यदि किसी व्यक्ति को वास्तव में सुरक्षा का खतरा है तो उसे कानून के तहत संबंधित अधिकारियों से सुरक्षा मांगने का अधिकार है, लेकिन अधिकारियों के साथ तस्वीरों और सार्वजनिक पोस्टों के जरिए प्रभाव का प्रदर्शन करना और फिर उसी प्रभाव को आधार बनाकर सुरक्षा की मांग करना आखिर किस उद्देश्य की ओर इशारा करता है?
हिंदू संगठन की जिम्मेदारी पर भी उठे सवाल
शंखधर स्वयं को हिंदू समाज और संगठन से जुड़ा पदाधिकारी बताते हैं। उनके समर्थकों के अनुसार वह अंतरराष्ट्रीय हिंदू संगठन के जिला अध्यक्ष हैं। ऐसे में उनके विरोधियों का कहना है कि सामाजिक संगठन के जिम्मेदार पद पर रहते हुए उन्हें समाज में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए, न कि लगातार विवादों और शिकायतों के कारण चर्चा में रहना चाहिए हालांकि संगठन में उनका वर्तमान पद और उसकी आधिकारिक स्थिति भी संबंधित संगठन से सत्यापित की जानी चाहिए।
अब पुलिस रिकॉर्ड से खुलेगा पूरा सच
शंखधर की ओर से सुरक्षा की मांग किए जाने के बाद अब निगाहें पुलिस-प्रशासन पर हैं। यदि उनके खिलाफ वास्तव में कई मुकदमे और शिकायतें दर्ज हैं तो उनकी प्रकृति, वर्तमान स्थिति और न्यायालय में चल रही कार्रवाई सार्वजनिक होने से पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
फिलहाल एक तरफ शंखधर अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पोस्ट और आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर पुलिस रिकॉर्ड और न्यायिक दस्तावेज ही यह तय करेंगे कि सुरक्षा की मांग के पीछे वास्तविक खतरा कितना है और विवादों का आधार क्या है।।

