Thursday, September 24, 2026
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किच्छा की सियासत में 15 साल पुराना थप्पड़ कांड फिर सुर्खियों में किच्छा मंडी प्रकरण के बाद भदईपुरा रामलीला मैदान का पुराना विवाद फिर चर्चा में, 2011 में हाथापाई-पथराव तक पहुंच गया था मामला

किच्छा की सियासत में 15 साल पुराना थप्पड़ कांड फिर सुर्खियों में

किच्छा मंडी प्रकरण के बाद भदईपुरा रामलीला मैदान का पुराना विवाद फिर चर्चा में, 2011 में हाथापाई-पथराव तक पहुंच गया था मामला

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर/किच्छा। किच्छा में नगर निकाय चुनाव के दौरान स्ट्रांग रूम परिसर के बाहर विधायक तिलकराज बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला से जुड़े समर्थकों के बीच हुए विवाद के बाद दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक टकराव का पुराना इतिहास एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मौजूदा विवाद के बीच सोशल मीडिया पर भदईपुरा रामलीला मैदान से जुड़े वर्ष 2011 के घटनाक्रम के कुछ पुराने वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। इसी पुराने घटनाक्रम में तिलकराज बेहड़ द्वारा राजेश शुक्ला को थप्पड़ मारे जाने का आरोप सामने आया था। हालिया रिपोर्टों में भी इस घटना का उल्लेख किया गया है।भदईपुरा रामलीला मैदान को लेकर शुरू हुआ था विवाद

वर्ष 2011 में रुद्रपुर के किच्छा रोड स्थित भदईपुरा क्षेत्र में रामलीला मैदान के कब्जे और रामलीला आयोजन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद खड़ा हुआ था। उपलब्ध समकालीन समाचार रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2010 के आसपास शुरू हुआ यह विवाद धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि तत्कालीन विधायक तिलकराज बेहड़ और भाजपा नेता राजेश शुक्ला आमने-सामने आ गए थे।

दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने पर स्थिति हाथापाई और पथराव तक पहुंच गई थी। कानून-व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। उस समय यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया था।

कहासुनी के बाद थप्पड़ मारने का आरोप

इसी विवाद के दौरान बेहड़ और शुक्ला के बीच तीखी कहासुनी होने की बात सामने आई थी। बाद की रिपोर्टों में यह उल्लेख मिलता है कि विवाद के दौरान तत्कालीन विधायक तिलकराज बेहड़ ने राजेश शुक्ला को थप्पड़ मारा था। यही वजह है कि मौजूदा किच्छा मंडी विवाद के बाद वर्ष 2011 का यह घटनाक्रम अचानक फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। हालांकि उस पुराने घटनाक्रम से जुड़े सोशल मीडिया वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। वायरल वीडियो के संदर्भ, तारीख और पूरी रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उसके आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

मामला प्रशासनिक स्तर तक पहुंचा

भदईपुरा रामलीला मैदान का विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा था। मामला प्रशासनिक और कानूनी स्तर तक पहुंचा। अप्रैल 2011 में प्रकाशित समाचार के अनुसार, परगना मजिस्ट्रेट ने विवादित रामलीला मैदान के संबंध में पुरानी कमेटी के पक्ष में फैसला सुनाया था।

फैसले में कहा गया था कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर श्री सनातन रामलीला कमेटी भदईपुरा द्वारा रामलीला का मंचन किया जाना सिद्ध होता है। साथ ही विवादित भूमि के संबंध में आगे किसी प्रकार के नवनिर्माण पर भी स्वामित्व संबंधी निर्णय होने तक रोक की बात कही गई थी।

पुराना विवाद क्यों आया फिर सामने?

करीब 15 वर्ष बाद किच्छा में सामने आए ताजा विवाद ने दोनों नेताओं के बीच पुराने राजनीतिक टकराव की यादें फिर ताजा कर दी हैं। हालिया नगर निकाय चुनाव के दौरान स्ट्रांग रूम में मतपेटियां जमा कराने को लेकर विधायक तिलकराज बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला आमने-सामने आ गए विवाद के दौरान धक्का-मुक्की हुई और बेहड़ ने आरोप लगाया कि उन्हें थप्पड़ मारा गया पुलिस ने दोनों पक्षों को हिरासत में लेकर स्थिति को नियंत्रित किया था।

इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने मौजूदा घटना की तुलना वर्ष 2011 के भदईपुरा प्रकरण से करनी शुरू कर दी। पुराने वीडियो और तस्वीरें दोबारा साझा किए जाने लगे इस तरह करीब डेढ़ दशक पुराना घटनाक्रम एक बार फिर किच्छा की राजनीतिक चर्चाओं में लौट आया।

2011 से 2026 तक बदले राजनीतिक समीकरण

दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता कोई नई बात नहीं है। हालिया रिपोर्टों में भी वर्ष 2011 की घटना को उनके बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा गया है। वर्ष 2011 के भदईपुरा रामलीला मैदान विवाद में जहां मामला मैदान के प्रबंधन और रामलीला आयोजन को लेकर शुरू हुआ था, वहीं वर्षों बाद किच्छा के स्ट्रांग रूम में सामने आया विवाद चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों में बेहड़ और शुक्ला का आमना-सामना होने के कारण पुराना घटनाक्रम फिर चर्चा में आ गया है। मौजूदा विवाद के बाद भदईपुरा रामलीला मैदान से जुड़े पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो को लेकर समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। पुराने घटनाक्रम को लेकर उपलब्ध समाचार रिकॉर्ड में रामलीला मैदान विवाद, दोनों पक्षों के आमने-सामने आने, हाथापाई-पथराव और बाद में प्रशासनिक फैसले का उल्लेख मिलता है।

इस बीच ताजा किच्छा मंडी प्रकरण ने यह जरूर दिखा दिया है कि करीब डेढ़ दशक पुराने राजनीतिक टकराव की घटनाएं आज भी स्थानीय राजनीतिक विमर्श में संदर्भ के तौर पर सामने आती हैं।।

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