सातवें दिन भी जारी रहा मजदूर सत्याग्रह, 102 श्रमिकों की सवेतन कार्यबहाली की मांग
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
ऐरा श्रमिक संगठन के बैनर तले मजदूरों का सत्याग्रह मंगलवार को सातवें दिन भी जारी रहा। महिला श्रमिकों, बच्चों और सैकड़ों मजदूरों ने कंपनी गेट पर पहुंचकर 102 स्थायी श्रमिकों की सवेतन कार्यबहाली की मांग को लेकर धरना दिया।
श्रमिक संगठन का आरोप है कि 16 सितंबर से श्रमिक निर्धारित ड्यूटी समय में सुबह 9 बजे कंपनी गेट पर पहुंच रहे हैं और शाम 5 बजे वापस लौट रहे हैं, लेकिन कंपनी प्रबंधन द्वारा उन्हें कार्य पर वापस नहीं लिया जा रहा है। संगठन के अनुसार, कंपनी प्रबंधन द्वारा श्रमिकों को कंपनी गेट से हटाने के लिए अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सत्याग्रह जारी है।
संगठन ने बताया कि कंपनी प्रबंधन की ओर से मंगलवार को रुद्रपुर सिविल कोर्ट में भी पक्ष रखा गया, जहां अगली तारीख 15 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
श्रमिक संगठन के अनुसार, 16 सितंबर को अपेक्स बिल्डर लिमिटेड में हुई वार्ता के दौरान सहायक श्रम आयुक्त (ALC) द्वारा 28 सितंबर को जिला प्रशासन की मौजूदगी में वार्ता कराए जाने का आश्वासन दिया गया था। संगठन का कहना है कि अब तक इस संबंध में उन्हें कोई लिखित सूचना नहीं मिली है। इसी मामले में मंगलवार को श्रमिक ALC रुद्रपुर से मिलने पहुंचे, लेकिन उन्हें बताया गया कि अधिकारी किच्छा में हैं। संगठन का दावा है कि 17 सितंबर से लगातार ALC से मिलने का प्रयास किया जा रहा है।
संगठन ने अपने पत्र में कहा है कि एनसीएलटी, दिल्ली की प्रक्रिया के तहत अपेक्स बिल्डसिस लिमिटेड, सेक्टर-09, सिडकुल पंतनगर की नीलामी प्रक्रिया पूरी हुई थी। संगठन के अनुसार, नीलामी की शर्तों में श्रमिकों और कर्मचारियों से संबंधित प्रावधान भी शामिल थे तथा नए स्वामी द्वारा एनसीएलटी के समक्ष शपथपत्र प्रस्तुत कर नीलामी की शर्तों को स्वीकार किया गया था। संगठन का आरोप है कि इसके बावजूद 102 स्थायी श्रमिकों की कार्यबहाली अब तक नहीं की गई है।
श्रमिक संगठन का यह भी कहना है कि मामले को लेकर एनसीएलएटी में याचिका दायर की गई थी, जिसमें नीलामी प्रक्रिया में निर्धारित शर्तों को पक्षकारों के लिए बाध्यकारी बताया गया। संगठन का आरोप है कि इसके बावजूद श्रमिकों की कार्यबहाली नहीं हुई।
संगठन ने श्रम विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि श्रमायुक्त उत्तराखंड द्वारा सहायक श्रम आयुक्त रुद्रपुर को उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन संगठन के अनुसार अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। संगठन ने कंपनी में ठेका श्रमिकों से बिना आवश्यक लाइसेंस के उत्पादन कार्य कराए जाने का आरोप भी लगाया है।
श्रमिक संगठन के अनुसार, जिला स्तरीय कमेटी के समक्ष कई दौर की वार्ता हो चुकी है। संगठन का दावा है कि इन बैठकों में अधिकारियों के स्तर से भी 102 श्रमिकों की कार्यबहाली के बिना उत्पादन शुरू किए जाने को लेकर आपत्ति जताई गई थी। इसके बावजूद श्रमिकों की सवेतन कार्यबहाली नहीं की गई।
संगठन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले में संबंधित न्यायिक एवं प्रशासनिक आदेशों तथा नीलामी प्रक्रिया में निर्धारित शर्तों के अनुपालन को सुनिश्चित कराया जाए और 102 श्रमिकों की तत्काल सवेतन कार्यबहाली कराई जाए।
मंगलवार को सत्याग्रह स्थल पर दीपा देवी, संगीता, अनीशा देवी, पूनम देवी, पूर्णिमा, भरत जोशी, दीवान सिंह, प्रदीप सिंह, बुद्ध सेन, सत्येंद्र कुमार, गणेश चंद, उपेंद्र, सूर्यभान यादव, दिव्या, इशानी, अपेक्षा और मयंक गंगवार समेत बड़ी संख्या में श्रमिक, महिलाएं और बच्चे मौजूद रहे।।

