ऊधम सिंह नगर

ईओ रोहिताश शर्मा का एक और कथित कारनामा! 20 लीटर का टेंडर… शहर में लगे 17 लीटर के डस्टबिन? ₹1.65 करोड़ की खरीद पर उठे गंभीर सवाल

ईओ रोहिताश शर्मा का एक और कथित कारनामा!

20 लीटर का टेंडर… शहर में लगे 17 लीटर के डस्टबिन?

₹1.65 करोड़ की खरीद पर उठे गंभीर सवालसौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान

नैनीताल। नगर पालिका परिषद नैनीताल के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा से जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब करोड़ों रुपये की डस्टबिन खरीद को लेकर नया विवाद सामने आया है। शहर के जागरूक नागरिकों का आरोप है कि जिस खरीद के लिए टेंडर में 20 लीटर क्षमता के डस्टबिन का उल्लेख किया गया था, मौके पर लगाए गए कई डस्टबिन मात्र 17 लीटर क्षमता के हैं। यदि यह दावा सही है तो यह केवल तीन लीटर का अंतर नहीं, बल्कि सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन के उपयोग पर बड़ा सवाल है। जानकारी के अनुसार नगर पालिका ने लगभग ₹1.65 करोड़ की लागत से डस्टबिन खरीद का टेंडर जारी किया था। आरोप है कि निविदा में स्पष्ट रूप से 20 लीटर क्षमता के डस्टबिन की मांग की गई, लेकिन शहर में लगाए गए कई डस्टबिन निर्धारित मानक से छोटे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर भुगतान किस मानक के आधार पर किया गया? क्या मौके पर उपलब्ध सामग्री टेंडर की शर्तों के अनुरूप है या नहीं? इस कथित गड़बड़ी को लेकर शहर में विरोध प्रदर्शन भी हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यदि टेंडर की शर्तों से अलग सामग्री की आपूर्ति हुई है तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय तकनीकी और वित्तीय जांच कराने तथा खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नगर पालिका ने वास्तव में टेंडर के अनुरूप ही डस्टबिन खरीदे हैं तो प्रशासन को बिना देर किए पूरी खरीद प्रक्रिया, तकनीकी परीक्षण और भुगतान का रिकॉर्ड सार्वजनिक करना चाहिए। वहीं यदि टेंडर और वास्तविक आपूर्ति में अंतर पाया जाता है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।

गौरतलब है कि इससे पहले भी गाइड लाइसेंस, पार्किंग व्यवस्था, सफाई व्यवस्था और एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद जैसे मामलों को लेकर अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा विवादों में रहे हैं। अब डस्टबिन खरीद का मामला भी उन्हीं चर्चित विवादों की नई कड़ी बनता नजर आ रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या करोड़ों रुपये की इस खरीद की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

मामला आखिर है क्या?

दावा किया जा रहा है कि नगर पालिका के टेंडर दस्तावेजों में 20 लीटर क्षमता के डस्टबिन का उल्लेख है, जबकि शहर में लगाए गए कई डस्टबिन 17 लीटर क्षमता के बताए जा रहे हैं। इसी कथित अंतर को लेकर नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस खरीद प्रक्रिया की तकनीकी जांच कराकर जनता के सवालों का जवाब देता है या नहीं।

अगली किश्त में पढ़िए…

“खटारा वाहनों के भरोसे नैनीताल की सफाई! करोड़ों का बजट, फिर भी बदहाल व्यवस्था?”

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