जांच के बीच बदले अधिकारी, फिर उसी नगर पालिका में हुई वापसी! आखिर किसके संरक्षण में लौटे ईओ रोहिताश शर्मा?
जांच के बीच बदले अधिकारी, फिर उसी नगर पालिका में हुई वापसी! आखिर किसके संरक्षण में लौटे ईओ रोहिताश शर्मा?
• जांच के दौरान अधिकारी बदले, फिर दोबारा नैनीताल में मिली तैनाती
• एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद प्रकरण पर आज तक नहीं आया स्पष्ट निष्कर्ष
• गाइड लाइसेंस, पार्किंग, सफाई और खरीद मामलों पर जवाब मांग रही जनता
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
नैनीताल। नगर पालिका परिषद नैनीताल के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। गाइड लाइसेंस, पार्किंग व्यवस्था और सफाई व्यवस्था को लेकर पहले से विवादों में रहे शर्मा का नाम अब एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद प्रकरण को लेकर भी लगातार चर्चाओं में बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस मामले में जांच की चर्चा थी, उसी दौरान प्रशासनिक फेरबदल कैसे हुआ और फिर उसी अधिकारी की दोबारा नैनीताल नगर पालिका में तैनाती किन परिस्थितियों में कर दी गई?
सूत्रों के अनुसार, एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद प्रकरण की जांच आगे बढ़ रही थी और दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही थी। तभी जांच से जुड़े अधिकारी का तबादला हो गया। इसके कुछ समय बाद रोहिताश शर्मा की फिर से नैनीताल नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी के रूप में तैनाती हो गई। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच हुई थी तो उसका परिणाम आखिर कहां है? क्या जांच पूरी हो चुकी है, क्या उसे बंद कर दिया गया या वह अब भी फाइलों में दबी हुई है? वर्षों बाद भी शासन या प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे संदेह और चर्चाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
लोगों का कहना है कि यदि जांच में अधिकारी को क्लीन चिट मिली है तो रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। और यदि जांच अभी भी लंबित है तो इतने वर्षों तक फैसला क्यों नहीं हो पाया? इस चुप्पी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासनिक हलकों में भी यह चर्चा है कि जिस निकाय से जुड़े प्रकरण की जांच चर्चा में रही हो, वहां उसी अधिकारी की दोबारा तैनाती आखिर किन आधारों पर की गई। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
अब जनता सिर्फ चर्चाएं नहीं, बल्कि जवाब चाहती है। गाइड लाइसेंस, पार्किंग व्यवस्था, सफाई व्यवस्था और एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद प्रकरण—इन सभी मामलों पर शासन और अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा को सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखना चाहिए, ताकि तथ्य सामने आएं और भ्रम की स्थिति समाप्त हो।
सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—क्या शासन इन मामलों की पूरी सच्चाई जनता के सामने लाएगा, या फिर नैनीताल नगर पालिका से जुड़े ये सवाल हमेशा की तरह फाइलों और चुप्पी के बीच दबे रहेंगे?
