‘खेत बचाओ’ कार्यक्रम में अन्न की बर्बादी का आरोप! सैकड़ों कुंतल भोजन खुले मैदान में फेंकने की शिकायत, सरकारी धन के दुरुपयोग पर उठे बड़े सवाल
‘खेत बचाओ’ कार्यक्रम में अन्न की बर्बादी का आरोप! सैकड़ों कुंतल भोजन खुले मैदान में फेंकने की शिकायत, सरकारी धन के दुरुपयोग पर उठे बड़े सवा
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। किसानों को बचाने और अन्न के सम्मान का संदेश देने वाले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के “खेत बचाओ” कार्यक्रम के बाद अब अन्न की कथित बर्बादी का मामला तूल पकड़ने लगा है। 26 जून को गांधी पार्क, रुद्रपुर में आयोजित इस सरकारी कार्यक्रम के बाद बड़ी मात्रा में पका हुआ भोजन खुले मैदान में पॉलीथिन की थैलियों में पड़ा मिला। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाईचारा एकता मंच के केंद्रीय अध्यक्ष के.पी. गंगवार ने जिलाधिकारी उद्यम सिंह नगर को विस्तृत शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा संबंधित ठेकेदार का भुगतान तत्काल रोकने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यक्रम में जनता के लिए आवश्यकता से कहीं अधिक भोजन तैयार कराया गया कार्यक्रम समाप्त होने के बाद चावल, राजमा, गुलाब जामुन सहित अन्य खाद्य सामग्री सैकड़ों पॉलीथिन की थैलियों में भरकर खुले मैदान में बिखरी पड़ी रही। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह भोजन लोगों को परोसने के बजाय खुले मैदान में सड़ने के लिए छोड़ दिया गया, जिससे न केवल भारी मात्रा में अन्न की बर्बादी हुई बल्कि सरकारी धन का भी दुरुपयोग हुआ
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि भीड़ का सही आकलन किया गया होता तो इतनी बड़ी मात्रा में भोजन बर्बाद नहीं होता। आरोप लगाया गया है कि भोजन निर्माण कराने वाली संस्था अथवा ठेकेदार ने निजी लाभ और भुगतान बढ़ाने के उद्देश्य से आवश्यकता से अधिक भोजन तैयार कराया, जिसके कारण बड़ी मात्रा में खाद्यान्न बेकार चला गया।
शिकायत में कहा गया है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि करदाताओं के पैसे और अन्न दोनों के साथ खिलवाड़ है।
शिकायत पत्र के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों और मॉर्निंग वॉक पर आने वाले नागरिकों ने भी भोजन को खुले मैदान में पड़ा देखा। बताया गया है कि इस पूरे मामले के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए, जिसके बाद पूरे शहर में चर्चा शुरू हो गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों और कृषि के प्रति सम्मान का संदेश देना था, उसी कार्यक्रम में अन्न का इस तरह अपमान होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
शिकायत में जिलाधिकारी से मांग की गई है कि भोजन निर्माण कराने वाली संस्था, संबंधित ठेकेदार और कार्यक्रम के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित संस्था का भुगतान रोका जाए और भोजन निर्माण की निविदा प्रक्रिया की भी जांच कराई जाए शिकायत की प्रतिलिपि केंद्रीय कृषि मंत्री, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, खाद्य एवं रसद विभाग, मुख्य सचिव, आयुक्त कुमाऊं मंडल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं, तो आखिर सैकड़ों कुंतल भोजन की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? क्या सरकारी धन से तैयार हुआ भोजन इसी तरह खुले मैदान में फेंके जाने के लिए बनाया गया था? और क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों एवं ठेकेदार पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

