एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद का मामला फिर चर्चा में, ईओ रोहिताश शर्मा पर उठे पुराने सवाल वर्ष 2014-15 की खरीद प्रक्रिया को लेकर फिर शुरू हुई चर्चा, अभिलेख तलब होने के बावजूद जांच की स्थिति पर बना संशय
एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद का मामला फिर चर्चा में,
ईओ रोहिताश शर्मा पर उठे पुराने सवाल
वर्ष 2014-15 की खरीद प्रक्रिया को लेकर फिर शुरू हुई चर्चा,
अभिलेख तलब होने के बावजूद जांच की स्थिति पर बना संशय
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में गाइड लाइसेंस, पार्किंग व्यवस्था और सफाई व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब नगर पालिका परिषद नैनीताल के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा एक बार फिर पुराने एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद प्रकरण को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। करीब एक दशक पुराने इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच फिर से चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2014-15 में नगर पालिका द्वारा एलईडी स्ट्रीट लाइटों की खरीद की गई थी। उस समय खरीद प्रक्रिया को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठे थे। बाद में ऑडिट के दौरान भी इस खरीद से संबंधित आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई थी। इसके बाद मामले की जांच शुरू होने की चर्चाएं रही थीं, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी जांच की अंतिम स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सकी है।
सूत्रों के मुताबिक प्रकरण से जुड़े अभिलेख शासन स्तर पर तलब किए गए थे। संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से नगर पालिका प्रशासन को खरीद प्रक्रिया से संबंधित संपूर्ण रिकॉर्ड तथा संबंधित अधिकारी द्वारा प्रस्तुत प्रत्यावेदन के समर्थन में मूल अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इससे यह संकेत मिला था कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
हालांकि सवाल यह है कि यदि मामले में ऑडिट आपत्तियां दर्ज हुई थीं और जांच प्रक्रिया शुरू हुई थी, तो उसका अंतिम निष्कर्ष क्या रहा? क्या जांच पूरी हो चुकी है? यदि हां, तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि जांच अभी भी लंबित है तो इतने वर्षों की देरी का कारण क्या है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक धन से जुड़ी किसी भी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि किसी अधिकारी या संस्था पर सवाल उठे थे और जांच भी हुई थी, तो जनता को उसके परिणामों की जानकारी मिलनी चाहिए। इससे न केवल भ्रम की स्थिति समाप्त होगी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि एक दशक पुराने इस मामले का कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने क्यों नहीं आया। कई लोगों का मानना है कि यदि जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई थी तो संबंधित रिपोर्ट सार्वजनिक कर अधिकारी को भी राहत मिलनी चाहिए। वहीं यदि किसी स्तर पर खामियां मिली थीं तो उनकी जानकारी भी जनता के सामने आनी चाहिए।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि एलईडी स्ट्रीट लाइट खरीद प्रकरण की जांच आखिर किस निष्कर्ष तक पहुंची और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है? जवाब मिलने तक यह मामला चर्चाओं में बना रहने की संभावना है।
अगली किश्त में पढ़िए…
जांच के दौरान बदले अधिकारी, फिर वर्षों बाद दोबारा नैनीताल लौटे ईओ रोहिताश शर्मा। क्या महज संयोग है या इसके पीछे कोई और कहानी? पूरे घटनाक्रम की पड़ताल अगली रिपोर्ट में।।

