ऊधम सिंह नगर

सीएम के नाम पर दबाव बनाने का आरोप, 70 साल पुराने रास्ते पर कब्जे की शिकायत से मचा हड़कंप

सीएम के नाम पर दबाव बनाने का आरोप, 70 साल पुराने रास्ते पर कब्जे की शिकायत से मचा हड़कंप

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर। मुख्यमंत्री के नाम और कथित राजनीतिक प्रभाव का हवाला देकर किसानों पर जमीन बेचने का दबाव बनाने तथा 70 वर्ष पुराने सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा करने के आरोपों ने तहसील रुद्रपुर क्षेत्र में नया विवाद खड़ा कर दिया है। ग्राम लखाखेड़ा के ग्रामीणों ने उप जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।शिकायतकर्ता सोमनाथ बाठला, गुरबख्श लाल बाठला और दौलतराम ने आरोप लगाया है कि उनके खेतों तक पहुंचने वाला एकमात्र सार्वजनिक रास्ता, जो राजस्व अभिलेखों में वर्ष 1953 से दर्ज है, उस पर अवैध अतिक्रमण कर रास्ता बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता करीब 70 वर्षों से उपयोग में है और इसके बंद होने से उनकी कृषि भूमि तक पहुंच बाधित हो जाएगी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक उद्योग स्थापित करने वाले पक्ष द्वारा किसानों पर अपनी भूमि बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें यह कहकर डराया-धमकाया जा रहा है कि उद्योग में मुख्यमंत्री का पैसा लगा हुआ है और उच्च स्तर तक उनकी पहुंच है। शिकायतकर्ताओं ने इसे सत्ता के नाम पर दबाव बनाने का प्रयास बताया है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित पक्ष ने न्यायालय के एक आदेश का गलत अर्थ निकालते हुए सार्वजनिक रास्ते पर दीवार और अन्य निर्माण कर कब्जा करने की कोशिश की है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्होंने तहसील प्रशासन, एसडीएम, जिलाधिकारी और पुलिस सहित कई अधिकारियों को शिकायतें दीं, लेकिन अब तक रास्ते को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 112 नंबर पर सूचना देने के बावजूद मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के चलते उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उन्होंने प्रशासन से सार्वजनिक रास्ते को तत्काल खुलवाने, अतिक्रमण हटाने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे व्यापक जनआंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

हालांकि शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष भी सामने नहीं आया है। ऐसे में मामले की सच्चाई प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।।

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