ऊधम सिंह नगर में ओवरलोडिंग का ‘खेल’ बेखौफ ! परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, कार्रवाई के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
ऊधम सिंह नगर में ओवरलोडिंग का ‘खेल’ बेखौफ! परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, कार्रवाई के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर जनपद में ओवरलोड वाहनों और क्षमता से अधिक सवारियां ढो रहे यात्री वाहनों का संचालन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। सड़क सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और कार्रवाई के दावे केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं।
जनपद के प्रमुख मार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों, ग्रामीण संपर्क सड़कों और औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन संचालित होते हैं। स्थानीय लोगों और परिवहन कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इनमें से अनेक वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर सड़कों पर दौड़ते हैं। इसके बावजूद ओवरलोडिंग के खिलाफ वह सख्ती दिखाई नहीं देती जिसकी अपेक्षा परिवहन विभाग से की जाती है।
सबसे ज्यादा सवाल सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) नवीन कुमार सिंह की कार्यशैली को लेकर उठ रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि विभाग समय-समय पर कार्रवाई और चालान की जानकारी तो जारी करता है, लेकिन धरातल पर ओवरलोडिंग की समस्या जस की तस बनी हुई है। यदि नियमित और प्रभावी चेकिंग हो रही होती तो सड़कों पर इतने बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन दिखाई नहीं देता।
औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल की बात करें तो यहां से प्रतिदिन सैकड़ों मालवाहक वाहन विभिन्न राज्यों के लिए रवाना होते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई वाहन निर्धारित मानकों से अधिक माल लेकर चलते हैं, जिससे न केवल सड़कों को नुकसान पहुंचता है बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। लोगों का कहना है कि विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है और वास्तविक समस्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
यात्री वाहनों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। जिले के कई मार्गों पर संचालित मैक्स, विक्रम, ऑटो और अन्य सार्वजनिक वाहनों में क्षमता से कहीं अधिक यात्रियों को बैठाकर सफर कराया जा रहा है। कई बार वाहन के अंदर सीटें भरने के बाद भी यात्रियों को खड़े होकर यात्रा करनी पड़ती है। नियमों के अनुसार यह गंभीर उल्लंघन है, लेकिन ऐसे वाहनों पर कार्रवाई के मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरलोड वाहन और क्षमता से अधिक सवारियां लेकर चलने वाले यात्री वाहन किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। अधिक भार के कारण वाहनों के ब्रेक और अन्य तकनीकी प्रणालियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसके बावजूद यदि नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं कराया जा रहा है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
जनपद में यह चर्चा भी आम है कि ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस विभाग कई बार परिवहन विभाग से अधिक सक्रिय नजर आता है। लोगों का कहना है कि जिस स्तर की निगरानी और प्रवर्तन परिवहन विभाग को करना चाहिए, वह अपेक्षित रूप से दिखाई नहीं देता यही कारण है कि नियम तोड़ने वालों के हौसले बुलंद बने हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार परिवहन विभाग द्वारा समय-समय पर चालान और जब्ती की कार्रवाई किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि कार्रवाई प्रभावी है तो फिर ओवरलोडिंग और मानकों के उल्लंघन की शिकायतें लगातार क्यों सामने आ रही हैं। आम लोगों का मानना है कि केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि नियमित और निष्पक्ष अभियान चलाने की आवश्यकता है।
कुछ लोगों द्वारा परिवहन कारोबारियों और विभागीय अधिकारियों के बीच कथित सांठगांठ के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों ने विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लोगों का कहना है कि यदि उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मुख्यमंत्री, परिवहन आयुक्त, मंडलीय अधिकारियों और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि ओवरलोडिंग और यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त अंकुश लगाना जरूरी है, क्योंकि यह केवल नियमों का मामला नहीं बल्कि आम जनता की सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय है। जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर जब सड़कों पर खुलेआम ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं और यात्री वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जा रही हैं, तो जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई का वास्तविक असर दिखाई क्यों नहीं दे रहा। यह सवाल प्रशासनिक व्यवस्था और प्रवर्तन तंत्र दोनों के सामने खड़ा है। समाचार में उल्लेखित आरोप स्थानीय लोगों और सूत्रों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों पर सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) नवीन कुमार सिंह अथवा परिवहन विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।।

