आरक्षण आंदोलन के 22वें दिन धरना स्थल पर अराजकता का आरोप, आंदोलनकारियों ने कहा— संघर्ष रहेगा जारी
आरक्षण आंदोलन के 22वें दिन धरना स्थल पर अराजकता का आरोप, आंदोलनकारियों ने कहा— संघर्ष रहेगा जारी
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। बंगाली समाज के आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे “आरक्षण हमारा अधिकार” अनिश्चितकालीन आंदोलन के 22वें दिन धरना स्थल पर तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ अराजक तत्वों ने धरना स्थल पर लगाए गए टेंट को क्षतिग्रस्त करने तथा आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया। साथ ही आसपास रखे सामान को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सुब्रत कुमार विश्वास ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की हरकतों से आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि बंगाली समाज अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है और किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा, “जो लोग आंदोलन को कमजोर करने का सपना देख रहे हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि यह लड़ाई अब पूरे समाज की लड़ाई बन चुकी है। हम अपने अधिकार लेकर रहेंगे।”
धरना स्थल पर 22वें दिन आंदोलन की जिम्मेदारी संभाल रहे सुभाष राय तथा बड़ी संख्या में मौजूद युवाओं ने भी आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। आंदोलनकारियों का कहना है कि इससे पहले भी टेंट को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया था और अब दोबारा ऐसी घटनाएं सामने आने से यह स्पष्ट होता है कि कुछ लोग आंदोलन की बढ़ती ताकत से परेशान हैं।
इस बीच आंदोलन को देश के विभिन्न हिस्सों से समर्थन मिलने का दावा किया गया। 22वें दिन छत्तीसगढ़ से पहुंचे रतन मंडल ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बंगाली समाज के अधिकारों की यह लड़ाई केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के लोगों की भावनाओं से जुड़ी हुई है।
रतन मंडल ने कहा कि समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए चल रहे इस संघर्ष को पूरे देश से सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ बड़े राजनीतिक नेता आंदोलन से दूरी बनाए हुए हैं, जिसके पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। उन्होंने स्थानीय नेताओं से व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर समाज के अधिकारों की लड़ाई में सहयोग करने की अपील की।
आंदोलनकारियों का दावा है कि लगातार बढ़ रहे जनसमर्थन से कुछ लोगों में बेचैनी है, जिसके चलते धरना स्थल को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने टेंट फाड़ने और आंदोलन को बाधित करने की कथित घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि अधिकारों की इस लड़ाई को किसी भी दबाव या साजिश से रोका नहीं जा सकता। आंदोलन के 22वें दिन भी बड़ी संख्या में लोग धरना स्थल पर पहुंचे और बंगाली समाज के आरक्षण की मांग के समर्थन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।।

