बिना इलाज दम तोड़ते मरीजों के दौर में उम्मीद जगाती हल्द्वानी की आयुष्मान टीम, 6 माह में बनाए 3 हजार कार्ड
बिना इलाज दम तोड़ते मरीजों के दौर में उम्मीद जगाती हल्द्वानी की आयुष्मान टीम, 6 माह में बनाए 3 हजार कार्ड
– धन के अभाव में दम तोड़ते मरीजों के बीच सुशीला तिवारी अस्पताल में उम्मीद जगाती आयुष्मान योजना की जमीनी हकीकत।
– 8 सदस्यीय टीम द्वारा नियमित वार्ड विजिट कर अनपढ़ और गरीब तीमारदारों की भर्ती से लेकर क्लेम तक की राह कर रही आसान।
– 6 महीने में 3000 परिवारों ka आयुष्मान कार्ड बनाकर दलालों और बिचौलियों के भ्रमजाल को तोड़ती इन 8 युवाओं की कड़ी मेहनत।
– प्रशासनिक काम की सीमाओं को लांघकर बीमारी से टूटे लाचार मरीजों के लिए विश्वास और नैतिक संबल बनी टीम।
– जिला समन्वयक नरेंद्र सिंह बोले- ‘सेवा ही संकल्प’ की भावना से अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा मुफ्त इलाज।
हल्द्वानी। आज के दौर में जब इलाज का खर्च आम आदमी की कमर तोड़ देता है और अक्सर धन के अभाव में लोग अस्पताल की चौखट पर दम तोड़ देते हैं, तब कुमाऊं के सबसे बड़े राजकीय मेडिकल कॉलेज और संबद्ध सुशीला तिवारी अस्पताल से राहत देने वाली ज़मीनी हकीकत सामने आई है। यहाँ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) केवल कागजी दावा नहीं, बल्कि गरीब मरीजों के लिए जीवनदान साबित हो रही है।
इस पूरी व्यवस्था को धरातल पर मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं को हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचाने का जिम्मा अस्पताल की एक 8 सदस्यीय आयुष्मान मित्र टीम ने उठा रखा है। यह टीम पिछले 4 वर्षों से बिना रुके लगातार मरीजों की सेवा में समर्पित है। राइटर इंफॉर्मेशन कंपनी के कर्मचारियों के रूप में बीएफए (BFA) की ओर से नियुक्त ये आठ युवा अस्पताल में आने वाले हर उस लाचार मरीज के लिए ढाल बन रहे हैं, जो पैसों की कमी या कागजी उलझनों के कारण इलाज से महरूम रह जाता है।
यह खबर केवल एक सरकारी आंकड़े का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए एक जरूरी संदेश और जागरूकता है जो जानकारी के अभाव में भारी-भरकम कर्ज लेकर निजी अस्पतालों के चक्कर काटते हैं।
सुशीला तिवारी अस्पताल के आधिकारिक आंकड़ों पर नज़र डालें, तो इस टीम ने बीते मात्र 6 माह के भीतर 3000 से अधिक नए आयुष्मान (गोल्डन) कार्ड बनाकर सीधे तौर पर उन परिवारों को मुफ्त इलाज की मुख्यधारा से जोड़ा है, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। टीम के सदस्य केवल काउंटर पर नहीं बैठते, बल्कि प्रतिदिन अस्पताल के विभिन्न संवेदनशील वार्डों का नियमित दौरा (वार्ड विजिट) करते हैं। वे वहाँ बेड पर जिंदगी की जंग लड़ रहे मरीजों और उनके परेशान तीमारदारों से सीधा संवाद करते हैं। दस्तावेज़ सत्यापन से लेकर भर्ती प्रक्रिया और क्लेम संबंधी उन जटिल कागजी कार्रवाइयों को चुटकियों में सुलझाते हैं, जिन्हें देखकर एक अनपढ़ या गरीब ग्रामीण मरीज अमूमन हिम्मत हार जाता है।
चौबीस घंटे स्वास्थ्य सेवाओं को सरल बनाने वाली इस साहसी टीम में नीमा, आरती रावत, भावना बिष्ट, आशीष, पंकज, कपिल, गोविंद और विजय शामिल हैं। आज जहाँ हर छोटी सेवा के बदले पैसों का खेल चलता है, वहाँ यह टीम प्रशासनिक कार्य की सीमाओं से आगे बढ़कर मरीजों के लिए अटूट विश्वास, अपनत्व और मानसिक सहारे का माध्यम बनी हुई है। इनकी सक्रियता के कारण ही सुशीला तिवारी अस्पताल में दलालों और बिचौलियों का भ्रमजाल भी टूट रहा है, जो अक्सर सीधे-साधे मरीजों को बहला-फुसलाकर ठगने की फिराक में रहते हैं।
वहीं आयुष्मान योजना के जिला समन्वयक नरेंद्र सिंह ने बताते हैं कि “सुशीला तिवारी अस्पताल में तैनात यह आयुष्मान मित्र टीम ‘सेवा ही संकल्प’ की वास्तविक भावना के साथ धरातल पर काम कर रही है। पिछले 6 महीनों में 3000 से अधिक जरूरतमंदों का कार्ड बनाना इनकी कड़ी मेहनत और ईमानदारी का सीधा प्रमाण है। हमारा मुख्य लक्ष्य यही है कि अस्पताल की चौखट पर आने वाले अंतिम पात्र व्यक्ति को भी धन के अभाव में इलाज से वंचित न होना पड़े। यह टीम स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुँचाने में जिला प्रशासन के एक मुख्य और सबसे मजबूत स्तंभ के रूप में कार्य कर रही है।।

