ऊधम सिंह नगर

बाजपुर में भूमि प्रकरण पर सख्ती: डीएम ने गठित की 4 सदस्यीय जांच समिति न्याय के बाद भी नहीं मिला कब्जा, पीड़ितों की गुहार पर डीएम ने लिया एक्शन विधायक के रसूख का आरोप, जमीन विवाद में डीएम की सख्ती

बाजपुर में भूमि प्रकरण पर सख्ती: डीएम ने गठित की 4 सदस्यीय जांच समिति

न्याय के बाद भी नहीं मिला कब्जा, पीड़ितों की गुहार पर डीएम ने लिया एक्शन

विधायक के रसूख का आरोप, जमीन विवाद में डीएम की सख्ती

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

बाजपुर। तहसील बाजपुर के ग्राम सैमलपुरी में भूमि से जुड़े एक गंभीर प्रकरण में जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनकी भूमि को कूटरचित साक्ष्यों के आधार पर दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज करा लिया गया है।शिकायतकर्ता श्रीमती नन्नी देवी पत्नी स्व. तुला सिंह एवं संजू कुमार मंगल सिंह पुत्र स्व. तुला सिंह, निवासी ग्राम सैमलपुरी, ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनके नाम खतौनी फसली 1413-1418 के अंतर्गत खाता संख्या 20 में खसरा नंबर 25/1 (रकबा 1.154 हेक्टेयर) व खसरा नंबर 26 (रकबा 0.379 हेक्टेयर) भूमि दर्ज है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व वाद संख्या 22/3 वर्ष 2010-11, धारा 229बी जमींदारी विनाश एवं भू-सुधार अधिनियम के तहत उक्त भूमि (कुल रकबा 1.274 हेक्टेयर) को कूटरचित साक्ष्यों के आधार पर अतुल कुमार पुत्र अरविंद कुमार, निवासी गुलजारपुर, तहसील बाजपुर के नाम दर्ज करा दिया गया।शिकायत में यह भी कहा गया है कि उक्त भूमि बुक्सा अनुसूचित जनजाति की है, जिसका हस्तांतरण नियमानुसार किसी सामान्य जाति के व्यक्ति के नाम नहीं किया जा सकता। साथ ही आरोप है कि वादी पक्ष को मामले के दौरान डराया-धमकाया गया और न्यायालय से उनके पक्ष में निर्णय आने के बावजूद उन्हें भूमि पर कब्जा नहीं करने दिया जा रहा है।

मामले में आरोपित के पिता क्षेत्रीय विधायक होने के कारण शिकायतकर्ताओं ने प्रभाव के दुरुपयोग की भी आशंका जताई है और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व), उपजिलाधिकारी बाजपुर, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी तथा जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को शामिल किया गया है।

जिलाधिकारी ने समिति को निर्देश दिए हैं कि शिकायत में उल्लिखित सभी बिंदुओं की गहनता से जांच कर 15 दिनों के भीतर स्पष्ट अभिमत सहित जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।।

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