ऊधम सिंह नगर

भारतीय न्यूट्रास्यूटिकल निर्यातकों ने बांग्लादेश में मंजूरी में देरी और भुगतान अटकने पर सरकार से हस्तक्षेप की मांग

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान

भारतीय न्यूट्रास्यूटिकल निर्यातकों ने बांग्लादेश में लगातार हो रही नियामकीय देरी और करोड़ों डॉलर के भुगतान अटकने को लेकर भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। निर्यातकों का कहना है कि सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनकी खेपों को मंजूरी मिलने में अनावश्यक देरी हो रही है, जिससे निर्यात प्रभावित हो रहा है।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, खाद्य सप्लिमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों की खेपें बांग्लादेश के औषधि महानियंत्रक (DGDA) में लंबी मंजूरी प्रक्रिया से गुजर रही हैं। जबकि स्थानीय आयातकों द्वारा सभी जरूरी दस्तावेज नियमानुसार प्रस्तुत किए जा चुके हैं।निर्यातकों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों में Certificate of Analysis (CoA), उत्पाद संरचना विवरण, निर्माण प्रक्रिया दस्तावेज, स्थिरता डेटा, तैयार उत्पाद की विशिष्टताएं, Material Safety Data Sheet (MSDS), Safety Assessment (SA) रिपोर्ट, प्राधिकरण पत्र, Free Sale Certificates (FSC), निर्यात किए गए देशों की सूची, WHO-GMP, ISO और FSSAI प्रमाणपत्र, तथा Certificate of Origin शामिल हैं।

इसके बावजूद, निर्यातकों का आरोप है कि मंजूरी प्रक्रिया में बार-बार पूछताछ और बदलती अनुपालन आवश्यकताओं के चलते देरी हो रही है। विशेष रूप से CoA रिपोर्ट को स्थानीय प्रयोगशालाओं के परीक्षण से मिलान करने की शर्त को बड़ी बाधा बताया जा रहा है, क्योंकि वहां प्रयोगशाला क्षमता सीमित है।

उद्योग प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि कई मामलों में भारतीय निर्यातकों के करोड़ों डॉलर के भुगतान बांग्लादेशी बैंकों में अटके हुए हैं। इससे तरलता पर दबाव बढ़ रहा है और छोटे व मध्यम निर्यातकों का कार्यशील पूंजी चक्र प्रभावित हो रहा है।

निर्यातकों ने इस स्थिति को संभावित ‘नॉन-टैरिफ बैरियर’ करार देते हुए Pharmexcil और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के समक्ष मामला उठाने की तैयारी की है। साथ ही, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के जरिए समाधान निकालने की मांग की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट को स्वीकार करना या आंशिक परीक्षण प्रणाली लागू करना इस समस्या के समाधान में मददगार हो सकता है।

निर्यातकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो भारत-बांग्लादेश के बीच न्यूट्रास्यूटिकल व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में उद्योग जगत ने सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप कर प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने और निर्यातकों के हितों की रक्षा करने की अपील की है।।

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