चम्पावत में वन पंचायतों के सशक्तिकरण पर मंथन, सरपंचों के सुझावों से तय होगी विकास दिशा
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
चम्पावत। जनपद चम्पावत में वन पंचायतों को सशक्त, प्रभावी और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जिला सभागार में जिलाधिकारी मनीष कुमार की अध्यक्षता में वन पंचायत सरपंचों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष वन एवं पर्यावरण सलाहकार समिति (दर्जा राज्य मंत्री) श्याम नारायण पांडे समेत जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए सरपंचों ने भाग लिया।
बैठक में बताया गया कि जिले में कुल 568 वन पंचायतें संचालित हैं, जिनके अंतर्गत 25,173.02 हेक्टेयर क्षेत्रफल आता है। वन पंचायतों का गठन वन अधिनियम की धारा 28 के तहत किया जाता है, जिसमें 9 सदस्य होते हैं—इनमें 50 प्रतिशत महिलाएं और 2 मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं। सरपंच का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित है।
सुझावों और समस्याओं पर खुलकर चर्चा
संवाद कार्यक्रम में सरपंचों ने वन संरक्षण, जल संरक्षण, आय वृद्धि और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर अपने सुझाव रखे। खुमाड़ के दान सिंह ने बांज के जंगलों की सुरक्षा और वनाग्नि प्रबंधन पर जोर दिया, जबकि जौलाड़ी के नारायण दत्त ने झाड़ियों के कटान और सुव्यवस्थित वन निर्माण की बात कही।
तड़ाग के उमेश सिंह ने वन पंचायतों की चारदीवारी और काला बांसा घास नियंत्रण की मांग रखी, वहीं रिखोली के जगदीश सिंह ने पंचायत भवन निर्माण की आवश्यकता जताई। वसंत तड़ागी ने चाल-खाल और जल स्रोतों के जीर्णोद्धार पर बल दिया।
इसके अलावा पौधों की सुरक्षा के लिए जाल, क्लाइमेट आधारित वृक्षारोपण, ओपन जिम स्थापना, अतिक्रमण रोकने, सौंदर्यीकरण और वन कर्मियों की सुरक्षा के लिए उपकरण उपलब्ध कराने जैसे सुझाव भी सामने आए।
जिलाधिकारी के निर्देश
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने वृक्षविहीन क्षेत्रों की पहचान कर प्रतिपूरक वनीकरण के तहत वृक्षारोपण सुनिश्चित करने और वन पंचायतों के लिए अलग से कार्यशाला आयोजित करने को कहा।
साथ ही सरपंचों से अगली बैठक में अपने-अपने क्षेत्रों की विकास योजनाएं तैयार कर प्रस्तुत करने का अनुरोध किया, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकें।
जिम्मेदारी के साथ संरक्षण का संदेश
दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे ने कहा कि जंगलों का संरक्षण केवल अधिकार नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। जल संरक्षण और पर्यावरण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की जरूरत है।
कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, जिला विकास अधिकारी दिनेश डिगारी, एसडीओ फॉरेस्ट सुनील कुमार, नेहा सोन, संबंधित रेंजर, वन पंचायत सदस्य और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।।

