Thursday, September 24, 2026
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रुद्रपुर में स्कूल परिवहन शुल्क वृद्धि पर अभिभावकों का उबाल, आंदोलन की चेतावनी

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर। शहर में निजी स्कूलों द्वारा परिवहन शुल्क में की गई भारी बढ़ोतरी के खिलाफ अभिभावकों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को अभिभावकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे को लेकर राज्य परिवहन प्राधिकरण, उत्तराखंड के अध्यक्ष/परिवहन आयुक्त को संबोधित ज्ञापन उपसंभागीय अधिकारी (एसडीएम), रुद्रपुर के माध्यम से सौंपा।

ज्ञापन में अभिभावकों ने बताया कि 25 मार्च 2026 को आयोजित एक बैठक में निजी स्कूलों की बसों और वैन से आने-जाने वाले छात्रों के लिए मासिक परिवहन शुल्क को ₹2200 से बढ़ाकर ₹3700 तक कर दिया गया है। इस निर्णय को लेकर अभिभावकों ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे अव्यवहारिक और जनविरोधी बताया।

अभिभावकों का कहना है कि पहले से ही शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। महंगी किताबें, स्कूल ड्रेस, वार्षिक शुल्क और ट्यूशन फीस ने परिवारों का बजट पहले ही बिगाड़ रखा है। ऐसे में परिवहन शुल्क में एकमुश्त इतनी बड़ी वृद्धि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर देगी।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि निजी स्कूल संगठन राज्य परिवहन प्राधिकरण, उत्तराखंड के आदेश का हवाला देकर इस बढ़ोतरी को अनिवार्य रूप से लागू कर सकते हैं, जिससे अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं बचेगा और उन्हें मजबूरी में बढ़ी हुई फीस चुकानी पड़ेगी।

ज्ञापन में स्पष्ट मांग की गई है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और परिवहन शुल्क को पूर्व की दरों पर ही लागू रखा जाए। अभिभावकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

इस दौरान सुशील गाबा, पूर्व पार्षद जगदीश तनेजा, पूर्व ग्राम प्रधान सुरेश गौरी, पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष जावेद अख्तर, पार्षद प्रतिनिधि सचिन मुंजाल, समाजसेवी सुरेंद्र गाबा, पूर्व पार्षद रमेश कालड़ा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष मोनू निषाद, हैप्पी रंधावा, सुनील छाबड़ा, कमल पांडे, अशोक कुमार, विक्की कुमार, करण कुमार, सुरेश वाधवा, प्रवीन कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद रहे।

प्रशासन पर टिकी निगाहें

अब इस पूरे मामले में प्रशासन और परिवहन विभाग की भूमिका अहम मानी जा रही है। अभिभावकों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा, जिससे आम लोगों को राहत मिल सके।।

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