Sunday, August 9, 2026
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ऊधम सिंह नगर

ग्रीष्मकालीन धान पर से प्रतिबंध हटा, किसानों को बड़ी राहत — मुख्यमंत्री धामी का बड़ा फैसला जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या ने जताया आभार, फैसले को बताया सराहनीय

ग्रीष्मकालीन धान पर से प्रतिबंध हटा, किसानों को बड़ी राहत — मुख्यमंत्री धामी का बड़ा फैसला

जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या ने जताया आभार, फैसले को बताया सराहनीय

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

ऊधम सिंह नगर। प्रदेश के किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित निर्णय लेते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर लंबे समय से लगी रोक को समाप्त करने की घोषणा की है। इस फैसले से विशेष रूप से तराई क्षेत्र और दलदली भूमि वाले इलाकों के हजारों किसानों को बड़ी राहत मिली है, जो वर्षों से इस प्रतिबंध के कारण प्रभावित हो रहे थे।मुख्यमंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में ग्रीष्मकालीन धान की खेती कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि तराई और दलदली भूमि की भौगोलिक स्थिति ऐसी है जहां धान के अलावा अन्य फसलों का उत्पादन करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं हो पाता। ऐसे में यदि धान की खेती पर रोक लगाई जाती है तो सीधे तौर पर किसानों की आजीविका प्रभावित होती है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी सोच के तहत यह निर्णय लिया गया है कि अब ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा, जिससे किसान अपनी पारंपरिक खेती को जारी रख सकेंगे और आर्थिक रूप से मजबूत हो सकेंगे।इस फैसले के बाद क्षेत्र के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है। किसानों का कहना है कि यह निर्णय उनके लिए जीवनरेखा साबित होगा, क्योंकि कई परिवार पूरी तरह धान की खेती पर निर्भर हैं। प्रतिबंध हटने से न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर भी मिलेंगे।

इस निर्णय का स्वागत करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझते हुए यह सराहनीय कदम उठाया है, जो उनकी संवेदनशीलता और दूरदर्शिता को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि यह फैसला प्रदेश के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देगा और किसानों के विश्वास को और मजबूत करेगा।स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह निर्णय क्षेत्रीय कृषि व्यवस्था के अनुकूल है। इससे न केवल पारंपरिक खेती को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कृषि उत्पादन में भी वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही, इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों का पलायन भी कम हो सकता है।

कुल मिलाकर, ग्रीष्मकालीन धान पर से प्रतिबंध हटाने का यह फैसला किसानों के हित में एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है और उन्हें नई उम्मीद और ऊर्जा प्रदान करता है।।

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