ऊधम सिंह नगर

पीआरडी तैनाती में अनियमितता का आरोप: 2011 से एक ही स्थान पर तैनात चालक पर उठे सवाल, रोस्टर सिस्टम लागू करने के सख्त निर्देश

पीआरडी तैनाती में अनियमितता का आरोप: 2011 से एक ही स्थान पर तैनात चालक पर उठे सवाल, रोस्टर सिस्टम लागू करने के सख्त निर्देश

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रूद्रपुर। जनपद में प्रान्तीय रक्षक दल (पीआरडी) की तैनाती व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जहां शासन पारदर्शिता के लिए रोस्टर सिस्टम लागू करने के सख्त निर्देश दे रहा है, वहीं विभागीय स्तर पर वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मियों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं।

प्रान्तीय रक्षक दल (पीआरडी) में तैनाती व्यवस्था को लेकर एक ओर शासन द्वारा पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर विभागीय अनियमितताओं के आरोप भी सामने आने लगे हैं। शिकायत के अनुसार, रामप्रकाश नामक पीआरडी वाहन चालक वर्ष 2011 से लगातार एक ही स्थान पर तैनात है, जो स्थापित नियमों के विपरीत बताया जा रहा है। आरोप है कि इतने लंबे समय तक एक ही जगह तैनाती न केवल शासन के निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि इससे भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है। गंभीर पहलू यह भी है कि विभागीय स्तर पर इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।इसी बीच शासन ने पीआरडी स्वयंसेवकों की तैनाती एवं नियंत्रण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और जवाबदेह बनाना है। जारी आदेश के अनुसार अब सभी जनपदों में पीआरडी स्वयंसेवकों की तैनाती एक सुव्यवस्थित रोस्टर प्रणाली के तहत की जाएगी। प्रत्येक स्वयंसेवक को क्रमवार नंबर आवंटित किया जाएगा और इसके लिए एक अलग रजिस्टर तैयार किया जाएगा, जिसमें उनका पूरा विवरण—नाम, पता, वर्तमान ड्यूटी और पूर्व तैनातियां—दर्ज रहेंगी।

निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को ही ड्यूटी पर लगाया जाएगा रोस्टर प्रणाली के तहत किसी भी स्वयंसेवक की तैनाती अधिकतम 6 माह के लिए ही होगी निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद अन्य स्वयंसेवकों को अवसर दिया जाएगा, ताकि सभी को समान मौका मिल सके अनुशासन के मामले में भी सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई स्वयंसेवक ड्यूटी में लापरवाही करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे तत्काल हटाकर पीआरडी एक्ट 1948 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

तैनाती की जिम्मेदारी जिला युवा कल्याण एवं पीआरडी अधिकारी को सौंपी गई है, जो रोस्टर के अनुसार नियुक्तियां सुनिश्चित करेंगे। वहीं ड्यूटी भत्ते का भुगतान संबंधित विभाग द्वारा एकाउंट पेयी चेक के माध्यम से किया जाएगा इसके अतिरिक्त, चुनाव, आपदा राहत और परीक्षाओं जैसी विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अन्य ड्यूटियों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराने का भी प्रावधान किया गया है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब शासन स्पष्ट रूप से रोस्टर प्रणाली लागू करने और एक ही स्थान पर लंबी तैनाती पर रोक लगाने के निर्देश दे चुका है, तो वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मियों पर कार्रवाई कब होगी। अब देखना यह होगा कि विभाग इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर कितनी गंभीरता से लागू करता है।।

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