गिरफ्तारी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव: अब लिखित में बताना होगा गिरफ्तारी का कारण, डीजीपी मुख्यालय ने जारी किए सख्त निर्देश
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
लखनऊ। प्रदेश में पुलिस कार्रवाई को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और कानूनसम्मत बनाने की दिशा में डीजीपी मुख्यालय ने बड़ा कदम उठाया है। अब किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने पर पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तारी का स्पष्ट कारण लिखित रूप से बताना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को उसकी समझ में आने वाली भाषा में भी यह जानकारी देनी होगी।
डीजीपी मुख्यालय की ओर से जारी सर्कुलर में प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया के दौरान सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि गिरफ्तारी मेमो में सभी आवश्यक जानकारियां पूरी तरह भरी जाएं और कोई भी कॉलम खाली न छोड़ा जाए।
अदालतों की सख्ती के बाद लिया गया फैसला
हाल के दिनों में कई मामलों में अदालतों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर टिप्पणी की थी। न्यायालयों ने पाया कि कुछ मामलों में पुलिस ने गिरफ्तार व्यक्तियों को गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया और न ही उचित प्रक्रिया का पालन किया गया। इसे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना गया इसी संदर्भ में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में यूपी पुलिस को दोषी ठहराया था। अदालत ने कहा था कि बिना पर्याप्त जानकारी दिए किसी व्यक्ति को हिरासत में रखना कानून के खिलाफ है। एक मामले में अदालत ने पाया कि एक व्यक्ति को अवैध रूप से गिरफ्तार कर लंबे समय तक जेल में रखा गया।
सरकार पर लगाया गया था जुर्माना
इन मामलों में अदालत ने राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये तक का हर्जाना लगाने के आदेश भी दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि अवैध गिरफ्तारी और नियमों के उल्लंघन की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे इन्हीं टिप्पणियों और आदेशों के बाद डीजीपी मुख्यालय हरकत में आया और पूरे प्रदेश में एक समान प्रक्रिया लागू करने के लिए नया सर्कुलर जारी किया गया।
गिरफ्तारी के समय क्या-क्या करना होगा नए निर्देशों के अनुसार—
गिरफ्तारी का कारण लिखित रूप से बताना अनिवार्य होगा।
आरोपी को उसकी भाषा में जानकारी दी जाएगी।
गिरफ्तारी मेमो में सभी कॉलम पूरी तरह भरे जाएंगे।
गिरफ्तारी का समय, स्थान और कारण स्पष्ट दर्ज होगा।
परिजनों या संबंधित व्यक्ति को सूचना देने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।
वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग करेंगे।
पुलिस अधिकारियों को दी गई चेतावनी
डीजीपी मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मामले में निर्देशों का पालन नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। इतना ही नहीं, अदालत ऐसे मामलों में गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर आरोपी को राहत भी दे सकती है। वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में गिरफ्तारी प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन न हो।
पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
पुलिस मुख्यालय का मानना है कि नए निर्देशों से गिरफ्तारी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। साथ ही इससे आम नागरिकों का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होगा। अधिकारियों के अनुसार यह कदम मानवाधिकारों की रक्षा और कानून के सही पालन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

