मानव तस्करों के नेटवर्क पर प्रहार की तैयारी, छह राज्यों की पुलिस ने मिलकर बनाई रणनीति पंतनगर में जुटे 134 प्रतिनिधि, अपहृत 13 वर्षीय बालिका को बिहार से बरामद कर पांच आरोपियों की गिरफ्तारी का मामला बना चर्चा का केंद्र चार माह के अपहृत शिशु को भी पुलिस ने सकुशल बचाया, उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मी सम्मानित
मानव तस्करों के नेटवर्क पर प्रहार की तैयारी, छह राज्यों की पुलिस ने मिलकर बनाई रणनीति
पंतनगर में जुटे 134 प्रतिनिधि, अपहृत 13 वर्षीय बालिका को बिहार से बरामद कर पांच आरोपियों की गिरफ्तारी का मामला बना चर्चा का केंद्र
चार माह के अपहृत शिशु को भी पुलिस ने सकुशल बचाया, उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मी सम्मानित
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
पंतनगर। मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क को ध्वस्त करने और इसके पीछे सक्रिय अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने अंतरराज्यीय समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। पंतनगर के गांधी हॉल ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय मानव तस्करी सम्मेलन में छह राज्यों के 134 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेकर अपराध की रोकथाम, पीड़ितों के सुरक्षित बचाव और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई की रणनीति पर मंथन किया सम्मेलन में स्पष्ट संदेश दिया गया कि मानव तस्करी के मामलों में केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को उजागर करना और पीड़ितों का पुनर्वास सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
गृह मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में आयोजित सम्मेलन में उत्तराखंड के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारी शामिल हुए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, केंद्रीय एजेंसियों, सरकारी विभागों, अभियोजन अधिकारियों, बाल कल्याण समितियों और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भागीदारी की।
अपराधियों के नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए समन्वय जरूरी
सम्मेलन का उद्घाटन अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखंड वी. मुरुगेशन ने किया उन्होंने कहा कि मानव तस्करी गंभीर और संगठित अपराध है। इस पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस के साथ सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच मजबूत तालमेल जरूरी है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने, कानूनी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन करने और पीड़ितों के पुनर्वास पर विशेष जोर दिया।
सम्मेलन में चर्चा हुई कि मानव तस्करी के अपराधी लगातार नए तौर-तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान, संदिग्ध गतिविधियों की समय पर पहचान और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है। अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नेटवर्क के विरुद्ध संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
बिहार से बरामद हुई 13 वर्षीय बालिका, पांच आरोपी गिरफ्तार
सम्मेलन में हरिद्वार पुलिस ने दो महत्वपूर्ण मामलों की केस स्टडी साझा की। पहले मामले में 13 वर्षीय अपहृत बालिका को बिहार से सकुशल बरामद किया गया और पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। दूसरे मामले में अपहृत चार माह के शिशु को सुरक्षित बरामद किया गया।
इन मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, त्वरित जांच और विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय की अहम भूमिका रही। इन उदाहरणों के जरिए बताया गया कि संवेदनशील मामलों में शुरुआती घंटों के दौरान सक्रियता और वैज्ञानिक विवेचना पीड़ितों की सुरक्षित बरामदगी में निर्णायक साबित हो सकती है।
पीड़ितों की सुरक्षा से लेकर पुनर्वास तक पर मंथन
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने मानव तस्करी के मामलों में आधुनिक जांच तकनीकों, साक्ष्य संकलन और प्रभावी अभियोजन की जरूरत पर प्रकाश डाला। साथ ही पीड़ितों की समयबद्ध पहचान, सुरक्षित बचाव, कानूनी सहायता और पुनर्वास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों और अन्य संवेदनशील वर्गों के मामलों में पुलिस को विशेष संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए। बचाए गए पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार सहायता सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, बाल कल्याण समितियों, सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच समन्वय आवश्यक है।
11 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
सम्मेलन में सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक पी.एम. नायर, एसडब्ल्यूआरसी बनबसा के संस्थापक-सचिव जनक बहादुर चंद, मदद फाउंडेशन के संस्थापक राजेश मणि, शक्ति वाहिनी के संस्थापक रविकांत, संयुक्त निदेशक विधि जी.सी. पंचोली और सहायक अभियोजन अधिकारी अपर्णा अवस्थी सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए सम्मेलन के समापन सत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया आयोजन का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की पुलिस और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय मजबूत कर मानव तस्करी के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना तथा पीड़ितों को सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराने के प्रयासों को गति देना रहा।।

