Friday, October 9, 2026
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रुद्रपुर में प्राचीन रामलीला मंच का भव्य शुभारंभ, प्रथम दिन नारद मोह लीला का हुआ मंचन

रुद्रपुर में प्राचीन रामलीला मंच का भव्य शुभारंभ, प्रथम दिन नारद मोह लीला का हुआ मंचन

मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी श्रीनारायण चैतन्य महाराज ने फीता काटकर किया उद्घाटन, राम नाम की महिमा का किया वर्णनसौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर। नगर की प्राचीन धार्मिक एवं सामाजिक परंपराओं के प्रतीक बस अड्डे के सामने स्थित प्रभु श्री रामलीला मंच का शुभारंभ धूमधाम से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मनकामेश्वर कल्याण आश्रम, कल्याणी व्यू के महंत स्वामी श्रीनारायण चैतन्य महाराज ने फीता काटकर तथा प्रभु श्रीराम की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्प अर्पित करके किया। शुभारंभ के पश्चात रामभजन प्रस्तुत किए गए।

इस अवसर पर स्वामी श्रीनारायण चैतन्य महाराज ने श्रद्धालुओं, रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों, सदस्यों और कलाकारों को संबोधित करते हुए राम नाम की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का नाम मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला है। राम नाम के स्मरण से बड़े-बड़े पापियों का भी उद्धार हुआ है। उन्होंने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से प्रभु के नाम की महिमा बताई।

रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गाबा ने स्वागत संबोधन में कहा कि रामलीला मंचन सनातन संस्कृति और भारत की प्राचीन परंपराओं का प्रतीक है। रामलीला के प्रसंग आपसी प्रेम, सद्भाव, मर्यादित जीवन, पारिवारिक मूल्यों, भाईचारे और माता-पिता के प्रति सम्मान की प्रेरणा देते हैं। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान जी से जुड़े प्रसंग आज के आधुनिक युग में भी प्रासंगिक हैं।

प्रथम दिन नारद मोह लीला का मंचन

रामलीला के प्रथम दिन नारद मोह लीला का मंचन किया गया। इसमें दिखाया गया कि देवर्षि नारद हिमालय के एक शांत स्थान पर भगवान के ध्यान में लीन होकर कठोर तपस्या कर रहे थे। उनकी तपस्या से देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगा। इंद्र को आशंका हुई कि कहीं नारद उनका पद प्राप्त करने के लिए तपस्या तो नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कामदेव को नारद की तपस्या भंग करने के लिए भेजा, लेकिन नारद की एकाग्रता भंग नहीं हुई असफल होने पर कामदेव ने उनसे क्षमा मांगी।

इसके बाद नारद के मन में अहंकार उत्पन्न हो गया और वे अपनी विजय का वर्णन करने ब्रह्मा जी, भगवान शंकर तथा भगवान विष्णु के पास पहुंचे भगवान शंकर ने उन्हें यह प्रसंग भगवान विष्णु को न सुनाने की सलाह दी, लेकिन नारद ने उनकी बात नहीं मानी। भगवान विष्णु ने अपने भक्त का अहंकार दूर करने के लिए लीला रची।

लीला के अनुसार, नारद को एक सुंदर नगर दिखाई दिया, जहां राजकुमारी विश्वमोहिनी का स्वयंवर होने वाला था राजकुमारी को देखकर नारद विवाह की इच्छा करने लगे और उन्होंने भगवान विष्णु से सुंदर रूप मांगा। भगवान विष्णु ने नारद को वानर जैसा मुख प्रदान कर दिया, जिसका उन्हें आभास नहीं हुआ स्वयंवर में राजकुमारी ने भगवान विष्णु को वरमाला पहना दी अपने मुख का प्रतिबिंब जल में देखकर नारद क्रोधित हो उठे और भगवान विष्णु को श्राप दे दिया कि उन्हें भी मनुष्य रूप में जन्म लेकर पत्नी का वियोग सहना पड़ेगा तथा वानरों की सहायता लेनी पड़ेगी। बाद में भगवान की माया दूर होने पर नारद को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने पश्चाताप करते हुए क्षमा मांगी।

कमेटी पदाधिकारियों ने अतिथियों का किया स्वागत

कार्यक्रम में रामलीला कमेटी, रामनाटक क्लब और सनातन धर्म युवा मंच के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथियों का फूलमाला, रामनाम का पटका और शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया।

इस दौरान रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गाबा, महामंत्री एवं संचालनकर्ता सुशील गाबा, कोषाध्यक्ष सीए अमित गंभीर, समन्वयक राजेश छाबड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश शर्मा, विजय अरोड़ा, हरीश अरोड़ा, महावीर आजाद, सचिव अमित अरोड़ा बोबी, राकेश सुखीजा, निदेशक सुभाष खंडेलवाल, संदीप धीर, मंच सचिव विजय जग्गा सहित रामलीला कमेटी और रामनाटक क्लब के अनेक पदाधिकारी, सदस्य एवं कलाकार मौजूद रहे नारद की भूमिका मनोज मुंजाल, देवराज इंद्र की भूमिका वैभव भुड्डी, कामदेव की भूमिका हर्ष अरोड़ा, ब्रह्मा जी की भूमिका सिद्धांत ग्रोवर, शंकर जी की भूमिका रवि चोपड़ा तथा विष्णु भगवान की भूमिका मनोज अरोड़ा ने निभाई। विश्वमोहिनी एवं लक्ष्मी जी की भूमिका कंवल गंभीर ने निभाई। मंच संचालन विजय जग्गा और संदीप धीर ने संयुक्त रूप से किया।।

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