Tuesday, September 29, 2026
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हिल बस टर्मिनल के संचालन को निजी हाथों में देने का विरोध, आंदोलनकारी मोर्चा ने दी चेतावनी

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान

काठगोदाम। संयुक्त उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विनोद घड़ियाल ने काठगोदाम में निर्माणाधीन हिल बस टर्मिनल के संचालन को निजी क्षेत्र को सौंपे जाने की संभावित योजना पर आपत्ति जताई है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि टर्मिनल का संचालन उत्तराखंड परिवहन निगम की देखरेख में ही किया जाए।

विनोद घड़ियाल ने बताया कि काठगोदाम क्षेत्र में बन रहा हिल बस टर्मिनल कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख बस टर्मिनल होगा। यहां पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों से आने-जाने वाली बसों के साथ ही निजी बसों के लिए भी व्यवस्था प्रस्तावित है। निर्माण कार्य को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद टर्मिनल को उत्तराखंड रोडवेज परिवहन निगम को हस्तांतरित किए जाने की बात कही गई है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने देहरादून में परिवहन निगम के महाप्रबंधक से वार्ता की। वार्ता के दौरान उन्होंने टर्मिनल परिसर में प्रस्तावित 12 दुकानों में से दो दुकानें राज्य आंदोलनकारियों के लिए आरक्षित करने की मांग रखी घड़ियाल के अनुसार, महाप्रबंधक की ओर से बताया गया कि नए नाम हिल बस टर्मिनल के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि परिवहन निगम की वर्तमान स्थिति को देखते हुए संचालन का जिम्मा किसी बड़ी निजी फर्म को दिए जाने की संभावना है।

इस पर मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जिस काठगोदाम क्षेत्र में कभी कुमाऊं का प्रमुख मेजर वर्कशॉप संचालित होता था और जहां से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला, आज उसी क्षेत्र में परिवहन निगम स्वयं बस टर्मिनल संचालित करने की स्थिति में क्यों नहीं है।
विनोद घड़ियाल ने कहा कि यदि टर्मिनल की 12 दुकानों में से दो दुकानें राज्य आंदोलनकारियों के लिए आरक्षित कर उन्हें आवंटित नहीं की गईं और हिल बस टर्मिनल का संचालन निजी क्षेत्र को सौंपने का प्रयास किया गया तो मोर्चा इसका विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर इसके खिलाफ जनआंदोलन भी शुरू किया जा सकता है।

उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि हिल बस टर्मिनल को निजी हाथों में सौंपने की योजना पर पुनर्विचार किया जाए और इसका संचालन उत्तराखंड परिवहन निगम की देखरेख में ही कराया जाए। उनका कहना है कि इससे परिवहन व्यवस्था के साथ स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार के अवसर भी बने रहेंगे।।

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