पार्ट-1: अल्मोड़ा के तीन अधिकारी ऊधम सिंह नगर में जमे, एक अधिशासी अभियंता तो दो सहायक अभियंता एक ही गृह जनपद के तीन अधिकारियों की एक ही जिले में तैनाती ने खड़े किए सवाल, विभागीय व्यवस्था पर उठी भौंहें
पार्ट-1 | अल्मोड़ा के तीन अधिकारी ऊधमसिंह नगर में जमे, एक अधिशासी अभियंता तो दो सहायक अभियंता
एक ही गृह जनपद के तीन अधिकारियों की एक ही जिले में तैनाती ने खड़े किए सवाल, विभागीय व्यवस्था पर उठी भौंहें
सौरभ गंगवार टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। ग्रामीण निर्माण विभाग में अधिकारियों की तैनाती को लेकर उपलब्ध विभागीय रिकॉर्ड ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेज में गृह जनपद अल्मोड़ा के तीन अधिकारी एक साथ ऊधम सिंह नगर जनपद में तैनात दिखाई दे रहे हैं। खास बात यह है कि तीनों अधिकारी विभाग के महत्वपूर्ण तकनीकी पदों पर हैं—एक अधिशासी अभियंता और दो सहायक अभियंता।
विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज विवरण के अनुसार अमित भारतीय का गृह जनपद अल्मोड़ा दर्ज है और वे अधिशासी अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। वहीं हेमंत चंद्र जोशी का गृह जनपद भी अल्मोड़ा दर्ज है और वे सहायक अभियंता के पद पर तैनात हैं। रिकॉर्ड में एक अन्य सहायक अभियंता का गृह जनपद भी अल्मोड़ा दर्ज है।
यानी एक ही गृह जनपद से जुड़े तीन अधिकारी एक ही जनपद में विभागीय जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। यह स्थिति अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन सरकारी विभाग में तैनाती की पारदर्शिता और स्थानांतरण व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े करती है।
क्या महज संयोग है या तैनाती का कोई खास समीकरण?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक ही गृह जनपद के तीन अधिकारियों की एक साथ ऊधमसिंह नगर में तैनाती किस आधार पर हुई? क्या इन अधिकारियों की तैनाती सामान्य स्थानांतरण प्रक्रिया के तहत हुई या इनके लिए विशेष प्रशासनिक निर्णय लिए गए? यदि तैनाती पूरी तरह नियमों के तहत है तो विभाग को इसके आदेश और आधार सार्वजनिक करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
विभागीय दस्तावेज में अधिकारियों की नियुक्ति और विभिन्न स्थानों पर तैनाती की तारीखों का विवरण भी दर्ज है। ऐसे में अब तैनाती आदेशों से लेकर वर्तमान पदस्थापना तक की पूरी श्रृंखला की जांच किए जाने की जरूरत महसूस होती है।
तीन अधिकारी, महत्वपूर्ण पद और एक ही जनपद मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां केवल सामान्य पदों पर तैनाती की बात नहीं है। अधिशासी अभियंता से लेकर सहायक अभियंताओं तक, तीनों अधिकारी ग्रामीण निर्माण विभाग के निर्माण कार्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में हैं। ऐसे में इनके कार्यक्षेत्र, स्वीकृत कार्यों, टेंडर प्रक्रिया, ठेकेदारों के साथ विभागीय कामकाज और भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
सवाल यह नहीं है कि तीनों अधिकारी अल्मोड़ा के हैं तो उन्हें ऊधमसिंह नगर में तैनात क्यों किया गया सवाल यह है कि क्या एक ही गृह जनपद से जुड़े तीन अधिकारियों की एक साथ महत्वपूर्ण पदों पर मौजूदगी महज प्रशासनिक आवश्यकता है या इसके पीछे कोई विशेष तैनाती पैटर्न है?
रिकॉर्ड खोल रहा है सवालों का पिटारा
यदि विभाग यह स्पष्ट करता है कि तीनों अधिकारियों की तैनाती निर्धारित नियमों के तहत हुई है, तो विवाद का एक बड़ा हिस्सा स्वतः समाप्त हो सकता है। लेकिन यदि तैनाती अवधि, स्थानांतरण आदेश और विभागीय नियमों में कोई विसंगति सामने आती है तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय होगा इसके साथ ही इनके कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों, टेंडर, अनुबंध, माप पुस्तिकाओं, भुगतान और कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए तो यह भी स्पष्ट हो सकता है कि तैनाती व्यवस्था का विभागीय कामकाज पर कोई प्रभाव पड़ा या नहीं।
अब विभाग से जवाब जरूरी
एक ही गृह जनपद अल्मोड़ा के तीन अधिकारियों की एक साथ ऊधम सिंह नगर में तैनाती किस आदेश के तहत हुई?
क्या इनकी वर्तमान तैनाती शासन की स्थानांतरण नीति के अनुरूप है?
तीनों अधिकारियों के तैनाती आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते?
क्या इनके कार्यक्षेत्र एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं?
इनके कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों और भुगतान का कोई स्वतंत्र ऑडिट हुआ है?
क्या शासन इन तीनों अधिकारियों की तैनाती और कार्यकाल की समीक्षा करेगा?

