भाजपा को भारी पड़ेगा बेहड़ को पड़ा थप्पड़? “किच्छा के सियासी रण में ‘थप्पड़’ की गूंज, 2027 तक जाएगा असर?” पालिका चुनाव से आगे निकली लड़ाई, 2027 से पहले बेहड़-शुक्ला की प्रतिष्ठा का बना सवाल स्ट्रांग रूम का विवाद अब सहानुभूति, सियासी मर्यादा और वर्चस्व की लड़ाई में तब्दील
भाजपा को भारी पड़ेगा बेहड़ को पड़ा थप्पड़?
“किच्छा के सियासी रण में ‘थप्पड़’ की गूंज, 2027 तक जाएगा असर?”
पालिका चुनाव से आगे निकली लड़ाई, 2027 से पहले बेहड़-शुक्ला की प्रतिष्ठा का बना सवाल
स्ट्रांग रूम का विवाद अब सहानुभूति, सियासी मर्यादा और वर्चस्व की लड़ाई में तब्दील
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
किच्छा। नगर पालिका चुनाव के मतदान के अंतिम दौर में स्ट्रांग रूम के बाहर हुआ बवाल अब महज एक चुनावी विवाद नहीं रह गया है। कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ को थप्पड़ मारे जाने की घटना ने किच्छा की पहले से गरम सियासत को नया मोड़ दे दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस घटनाक्रम का असर केवल पालिका चुनाव तक सीमित रहेगा या इसकी गूंज 2027 के विधानसभा चुनाव तक सुनाई देगी।
किच्छा का नगर पालिका चुनाव शुरू से ही सामान्य निकाय चुनाव के बजाय दो बड़े राजनीतिक चेहरों की प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह के पीछे विधायक तिलक राज बेहड़ पूरी ताकत से खड़े हैं, जबकि भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोरा के चुनाव की कमान पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने प्रमुखता से संभाली ऐसे में मुकाबला प्रत्याशियों के साथ-साथ बेहड़ और शुक्ला की राजनीतिक पकड़ की परीक्षा भी बन गया है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषण में इस चुनाव को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों खेमों के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है।
मंगलवार को मतदान के दौरान नवीन मंडी स्थित स्ट्रांग रूम के बाहर पर्दे लगाए जाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। बेहड़ ने चुनावी पारदर्शिता का सवाल उठाते हुए इसका विरोध किया। इसी दौरान राजेश शुक्ला भी समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। कहासुनी और धक्का-मुक्की के बीच बेहड़ को शुक्ला के साथ आए एक समर्थक द्वारा थप्पड़ मारे जाने का आरोप सामने आया। घटनाक्रम के बाद पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में भी लिया। घटना का वीडियो भी सामने आया है।
यहीं से चुनावी लड़ाई का नैरेटिव बदलता दिखाई दिया। मतदान से पहले तक भाजपा और कांग्रेस विकास, स्थानीय समस्याओं और अपने-अपने प्रत्याशियों को लेकर आमने-सामने थे। अब चर्चा का केंद्र चुनावी मुद्दों के साथ विधायक के साथ हुई घटना और राजनीतिक मर्यादा भी बन गई है।
बेहड़ के लिए सहानुभूति का फैक्टर?
राजनीतिक दृष्टि से कांग्रेस इस घटनाक्रम को बेहड़ के खिलाफ हमले के रूप में पेश कर रही है। कांग्रेस नेताओं के विरोध और जिले में प्रदर्शन की घोषणा से साफ है कि पार्टी इसे बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदलने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर भाजपा ने भी बेहड़ और उनके समर्थकों पर शुक्ला परिवार के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया है। इसलिए घटना का वास्तविक चुनावी असर मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिर भी बेहड़ के लिए एक राजनीतिक परिस्थिति जरूर बनी है। वह घटनास्थल पर स्ट्रांग रूम की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे थे और इसके बाद उनके साथ मारपीट का आरोप सामने आया ऐसे में कांग्रेस के पास अपने विधायक को चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करते हुए निशाना बनाए जाने का नैरेटिव सामने रखने का अवसर मिल गया है।
बेहड़ ने पुलिस को स्वयं तहरीर देने के बजाय प्रकरण को विधानसभा की विशेषाधिकार हनन समिति के सामने उठाने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि प्राथमिकी दर्ज होनी है तो मौके पर मौजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करें। इससे मामला अब स्थानीय पुलिस विवाद से आगे विधानसभा तक पहुंचने की संभावना रखता है। हालांकि पुलिस इस मामले में एक गिरफ्तारी कर चुकी है और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है लेकिन फिर भी मामला शांत होता नजर नहीं आ रहा कांग्रेस इस मामले में आक्रामक मूड में नजर आ रही है।
पुराना है बेहड़-शुक्ला का सियासी मुकाबला
तिलक राज बेहड़ और राजेश शुक्ला की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नई नहीं है। दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बयानबाजी लंबे समय से किच्छा की राजनीति का हिस्सा रही है। मौजूदा चुनाव में यह प्रतिस्पर्धा एक बार फिर खुलकर सामने आई और स्ट्रांग रूम के बाहर दोनों खेमों का आमना-सामना इसका सबसे तीखा रूप बन गया।
किच्छा विधानसभा के चुनावी इतिहास को देखें तो मुकाबले की अहमियत और स्पष्ट होती है। राजेश शुक्ला ने 2012 और 2017 में लगातार दो बार भाजपा के टिकट पर किच्छा विधानसभा सीट जीती थी। 2022 में तस्वीर बदली और कांग्रेस प्रत्याशी तिलक राज बेहड़ ने करीब 49 हजार से अधिक वोट हासिल कर शुक्ला को पराजित किया।
यानी पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों सीधे आमने-सामने रह चुके हैं। 2027 के लिए हालांकि दोनों दलों के प्रत्याशी अभी औपचारिक रूप से तय नहीं हैं, लेकिन मौजूदा विधायक बेहड़ और पूर्व विधायक शुक्ला की सक्रियता के कारण किच्छा की राजनीति लगातार इन्हीं दो ध्रुवों के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई देती है।
पालिका का परिणाम देगा बड़ा राजनीतिक संदेश
यही कारण है कि नगर पालिका अध्यक्ष का परिणाम केवल यह तय नहीं करेगा कि शहर की सरकार किसकी बनेगी इससे यह संकेत भी मिलेगा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में किच्छा नगर क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा की पकड़ कैसी है और बेहड़ तथा शुक्ला अपने-अपने समर्थक आधार को कितना साध पाए हैं।
सबसे दिलचस्प पहलू अब थप्पड़ प्रकरण का है। कांग्रेस इसे सहानुभूति और राजनीतिक मर्यादा का सवाल बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा अपने आरोपों के जरिए घटनाक्रम की अलग तस्वीर पेश कर रही है। मतदाता इसे किस रूप में लेते हैं, इसका ठोस जवाब परिणाम ही देगा।
लेकिन इतना तय है कि मतदान के अंतिम घंटों में हुआ यह विवाद किच्छा नगर पालिका चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना बन गया है। जिस चुनाव को पहले ही 2027 से पहले बेहड़ बनाम शुक्ला की सियासी परीक्षा माना जा रहा था, उसमें अब स्ट्रांग रूम के बाहर पड़ा एक थप्पड़ भी चुनाव बाद की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।।

