आपदा के दौर में जनता परेशान, काशीपुर के लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता की कार्यशैली पर उठे सवाल
आपदा के दौर में जनता परेशान, काशीपुर के लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता की कार्यशैली पर उठे सवाल
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
काशीपुर। उत्तराखंड में एक ओर मुख्यमंत्री लगातार आपदा प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने और जनता की समस्याओं का तत्काल समाधान करने के निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर काशीपुर स्थित लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिशासी अभियंता विवेक सक्सेना की कार्यशैली को लेकर स्थानीय लोगों में गंभीर नाराजगी देखने को मिल रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अधिशासी अभियंता के कार्यालय के बाहर जनता से मिलने का समय प्रातः 10:00 बजे से 12:00 बजे तक प्रदर्शित किया गया है। लोगों का कहना है कि आपदा जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में भी अधिकारियों का जनता से मिलने का समय केवल दो घंटे तक सीमित होना सवाल खड़े करता है। शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि कई बार अधिकारी निर्धारित समय पर भी कार्यालय में मौजूद नहीं रहते, जिससे दूर-दराज़ ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़कें क्षतिग्रस्त होने, पुल-पुलियों में आई खराबी और अन्य निर्माण संबंधी समस्याओं को लेकर लोग कई किलोमीटर का सफर तय कर कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें अधिकारी के उपलब्ध न होने की जानकारी मिलती है। आरोप है कि कई बार कर्मचारियों द्वारा अलग-अलग कारण बताकर लोगों को लौटा दिया जाता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कुछ शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि अधिशासी अभियंता अधिकतर समय अपने आवास पर रहते हैं, जिसके कारण कार्यालय में अधीनस्थ कर्मचारियों की मनमानी बढ़ गई है। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी की अनुपस्थिति में फरियादियों की समस्याओं का समय पर निस्तारण नहीं हो पाता और विभागीय कार्यों में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठते हैं।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि विभाग में कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि सेवानिवृत्ति निकट होने के कारण विभागीय निर्णयों और कार्यों को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
नागरिकों का कहना है कि आपदा के समय प्रत्येक अधिकारी की जिम्मेदारी सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहते हैं तो इसका सीधा असर राहत एवं मरम्मत कार्यों पर पड़ता है। उनका मानना है कि जनता की सुविधा के लिए अधिकारियों को अधिक समय तक उपलब्ध रहना चाहिए तथा शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
क्षेत्र के लोगों ने शासन और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि आम जनता का प्रशासन पर विश्वास बना रहे और आपदा जैसी गंभीर परिस्थितियों में लोगों को समय पर राहत मिल सके।।

