ग्रीन जोन की कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनी का खेल! सरकारी अध्यापक पर गंभीर आरोप, विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ग्रीन जोन की कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनी का खेल! सरकारी अध्यापक पर गंभीर आरोप, विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। लालपुर क्षेत्र के ग्राम कच्ची खमरिया में ग्रीन जोन की कृषि भूमि पर कथित रूप से अवैध कॉलोनी विकसित किए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि एक सरकारी अध्यापक द्वारा नियमों को दरकिनार कर खेती योग्य भूमि पर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग कर अवैध कॉलोनी काटी जा रही है। मामले को लेकर क्षेत्र में नाराजगी बढ़ रही है और लोगों ने प्रशासन से तत्काल जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार जिस भूमि पर कॉलोनी विकसित की जा रही है वह विकास प्राधिकरण के ग्रीन जोन क्षेत्र में आती है, जहां कृषि गतिविधियों के अलावा अन्य उपयोग के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होता है। आरोप है कि संबंधित भूमि का अभी तक भूमि उपयोग परिवर्तन (धारा 143) नहीं कराया गया है, इसके बावजूद वहां प्लॉटिंग कर लोगों को भूखंड बेचे जा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि भूमि का स्वरूप कृषि भूमि है और उसका भूमि उपयोग परिवर्तन नहीं हुआ है तो उस पर कॉलोनी विकसित करना नियमों के विपरीत माना जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किस आधार पर प्लॉटिंग का कार्य किया जा रहा है और संबंधित विभागों द्वारा इसकी निगरानी क्यों नहीं की गई।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में राजस्व नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचने की आशंका है। उनका कहना है कि बिना आवश्यक अनुमतियों और वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा किए कॉलोनी विकसित करना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि भविष्य में भूखंड खरीदने वाले लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अवैध कॉलोनियों के खिलाफ समय-समय पर प्रशासन और विकास प्राधिकरण द्वारा कार्रवाई की जाती रही है, लेकिन ग्राम कच्ची खमरिया में चल रही इस कथित प्लॉटिंग पर अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इससे विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि खुलेआम चल रहे इस कार्य के बावजूद संबंधित विभागों की चुप्पी समझ से परे है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, विकास प्राधिकरण तथा राजस्व विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए और अवैध रूप से विकसित की जा रही कॉलोनी पर रोक लगाई जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि कृषि भूमि को बचाने और नियोजित विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को ऐसे मामलों में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। वहीं, इस मामले में संबंधित अध्यापक अथवा अन्य पक्ष का आधिकारिक बयान समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।।

