बिगवाड़ा मंडी में अव्यवस्थाओं पर व्यापारियों का फूटा गुस्सा, अवैध वसूली से लेकर कब्जों तक लगाए गंभीर आरोप: उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
बिगवाड़ा मंडी में अव्यवस्थाओं पर व्यापारियों का फूटा गुस्सा, अवैध वसूली से लेकर कब्जों तक लगाए गंभीर आरोप; उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। जनपद की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में शुमार बिगवाड़ा मंडी इन दिनों व्यापारियों की नाराजगी का केंद्र बनी हुई है। वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थाओं, कथित अनियमितताओं और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर व्यापारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। व्यापारियों ने मंडी समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अवैध वसूली, दुकान एवं टीन शेड आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, बिना लाइसेंस कारोबार, अतिक्रमण, अवैध कब्जों और छोटे व्यापारियों के उत्पीड़न जैसे कई आरोप लगाए हैं। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में लंबे समय से विभिन्न समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा उनके समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। इससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और कारोबारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
नीलामी चबूतरों से अवैध किराया वसूली के आरोप
व्यापारियों ने आरोप लगाया कि मंडी परिसर के नीलामी चबूतरों से कथित रूप से अवैध रूप से किराया वसूला जा रहा है। उनका कहना है कि इस संबंध में कई बार मंडी प्रशासन और उच्च अधिकारियों को शिकायतें भेजी गईं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। व्यापारियों का आरोप है कि यदि मंडी के नियमों के विपरीत किसी भी प्रकार की वसूली की जा रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए उनका कहना है कि पारदर्शिता की कमी के कारण व्यापारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
दुकान और टीन शेड आवंटन को लेकर उठे सवाल
व्यापारियों ने मंडी में दुकान एवं टीन शेड आवंटन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि आवंटन के नाम पर लाखों रुपये की मांग किए जाने की चर्चाएं लंबे समय से मंडी में चल रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में सैकड़ों लाइसेंसधारी व्यापारी वर्षों से कारोबार कर रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में उन्हें आज तक स्थायी दुकानें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। कई व्यापारी खुले स्थानों पर या अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे कारोबार करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि जो व्यापारी नियमित रूप से मंडी शुल्क जमा करते हैं, उन्हें प्राथमिकता दिए जाने के बजाय आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है। व्यापारियों ने मांग की है कि सभी आवंटनों की समीक्षा कर सूची सार्वजनिक की जाए ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
बारिश में लाखों रुपये का माल हो रहा खराब
मंडी के सी और डी श्रेणी क्षेत्र में व्यापार करने वाले कारोबारियों ने आरोप लगाया कि उनकी दुकानों के सामने पर्याप्त टीन शेड उपलब्ध नहीं हैं। हर वर्ष बरसात के मौसम में कृषि उपज, फल, सब्जियां और अन्य व्यापारिक सामग्री बारिश की चपेट में आकर खराब हो जाती है। व्यापारियों का कहना है कि कई बार मंडी प्रशासन को ज्ञापन देकर टीन शेड निर्माण और मरम्मत की मांग की गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। उनका दावा है कि बारिश के दौरान हर साल लाखों रुपये मूल्य का माल खराब हो जाता है, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारियों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है।
बिना लाइसेंस कारोबार पर भी उठे गंभीर प्रश्न
व्यापारियों ने आरोप लगाया कि मंडी परिसर में बड़ी संख्या में लोग बिना वैध लाइसेंस के व्यापारिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि ऐसा हो रहा है तो यह मंडी नियमों का सीधा उल्लंघन है और इससे लाइसेंसधारी व्यापारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि मंडी प्रशासन की निगरानी व्यवस्था के बावजूद यदि बिना लाइसेंस कारोबार फल-फूल रहा है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
नीलामी चबूतरों पर कब्जों से बढ़ी परेशानी
व्यापारियों का आरोप है कि मंडी के कुछ नीलामी चबूतरों और सार्वजनिक उपयोग के स्थानों पर अवैध कब्जे किए गए हैं। इन कब्जों के कारण वास्तविक व्यापारियों को अपना कारोबार संचालित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि मंडी प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कब्जे हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि अतिक्रमण के कारण मंडी में आवागमन भी प्रभावित हो रहा है और व्यापारिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न हो रही है।
आवंटित दुकानों को किराए पर देने की शिकायत
व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मंडी में आवंटित दुकानों को स्वयं उपयोग करने के बजाय किराए पर दे रखा है और इससे आर्थिक लाभ अर्जित किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मंडी नियमों का उल्लंघन है। व्यापारियों ने मांग की है कि सभी दुकानों और टीन शेडों का सत्यापन कराया जाए तथा वास्तविक पात्र व्यापारियों को ही उनका लाभ मिले साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फल एवं ठेला व्यापारियों ने भी खोला मोर्चा
मंडी में कारोबार करने वाले फल एवं ठेला व्यापारियों ने भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि छोटे व्यापारियों पर कथित रूप से अनावश्यक दबाव बनाया जाता है और उनसे अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। छोटे व्यापारियों का कहना है कि सीमित पूंजी के साथ कारोबार करने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने से उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मांग की कि छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की जाए और सभी प्रकार की कथित अवैध वसूली पर रोक लगाई जाए।
मूलभूत सुविधाओं की कमी से बढ़ी नाराजगी
व्यापारियों का कहना है कि मंडी में सफाई व्यवस्था, जल निकासी, सड़क मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। बरसात के मौसम में कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है, जिससे व्यापारियों और किसानों दोनों को परेशानी होती है। व्यापारियों के अनुसार यदि मंडी में समय रहते आवश्यक सुधार कार्य नहीं किए गए तो आने वाले समय में समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। व्यापारियों ने मंडी समिति में लंबे समय से अध्यक्ष पद पर चुनाव नहीं होने का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में समय-समय पर चुनाव होना आवश्यक है ताकि व्यापारियों की समस्याएं प्रभावी रूप से संबंधित मंच तक पहुंच सकें। व्यापारियों का मानना है कि निर्वाचित प्रतिनिधित्व के अभाव में उनकी समस्याओं का समाधान अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से जल्द चुनाव प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की है।
उच्चस्तरीय जांच और सुधारात्मक कार्रवाई की मांग
व्यापारियों ने मंडी में व्याप्त कथित अनियमितताओं, अवैध वसूली, अतिक्रमण, दुकान एवं टीन शेड आवंटन, बिना लाइसेंस कारोबार और अन्य शिकायतों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके साथ ही उन्होंने मंडी की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था, व्यापारियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं और जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन की रणनीति बनाने पर विचार करेंगे हालांकि, व्यापारियों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। मंडी समिति अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।।

